सोने के दामों में उछाल से कारोबार मंदा

नूरपुर (कांगड़ा)। सोने की कीमतों की दिन-ब-दिन ऊंची छलांग से जनता और कारोबारी परेशान हैं।
आम आदमी की पहुंच से सोने का शृंगार दूर होने लगा है। बीते कुछेक साल से सोने की कीमतों में लगातार आ रहे उछाल का असर सर्राफा बाजार में साफ नजर आ रहा है। आमतौर पर विवाह-शादियों के सीजन में सर्राफा बाजार में काफी चहल-पहल रहती है, लेकिन इस बार ऐसा कुछ भी नजर नहीं आ रहा है। इस समय सर्राफा बाजार में सोने का भाव 31,250 रुपये प्रति दस ग्राम (तोला) चल रहा है। इससे पहले अक्तूबर में त्योहारी और वैवाहिक सीजन की मांग के चलते सोने के भाव 32,500 रुपये प्रति दस ग्राम तक हो गए थे। हालांकि, अगस्त माह में डॉलर के मुकाबले रुपये के कमजोर पड़ने से वैकल्पिक निवेश के रूप में सोने की मांग बढ़ने से भाव 35 हजार के रिकार्ड स्तर पर पहुंच गए थे। इससे पहले जुलाई में सोने के दाम 32 हजार से 25 हजार तक लुढ़कने पर लोगों ने जमकर सोने की खरीददारी की थी। जबकि त्योहारी और वैवाहिक सीजन की मांग और आयात में कमी के चलते विदेशी बाजारों में सोने में आई तेजी का असर घरेलू सर्राफा बाजार में भी दिखने लगा है। विवाह-शादियों के सीजन की शुरुआत के बावजूद गिने-चुने लोग ही सोने के आभूषणों की खरीददारी कर रहे हैं। जिसके चलते सोने का कारोबार करने वाले दुकानदारों को मंदी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय ज्वेलर मनोज पुरी, राजेश वर्मा, प्रदीप वर्मा, पंचम पुरी, रक्षपाल पुरी, सुधीर वर्मा ने बताया कि ग्राहक सोने का भाव पूछकर हाथ पीछे खींच रहे हैं। फिलहाल वही लोग खरीददारी कर रहे हैं, जिनके घर में शादी-ब्याह है।

8 साल में 25 हजार चढ़ा सोने का दाम
सोने की उछाल पर नजर दौड़ाएं तो वर्ष 2005 में सोने का भाव 7500 रुपये प्रति दस ग्राम था। 2006 में यह 8400, वर्ष 2007 में 10840, वर्ष 2008 में 12900, वर्ष 2009 में 15185, वर्ष 2010 में 16350, वर्ष 2011 में 26 हजार रुपये, सितंबर 2012 में 32,450 और नवंबर 2013 में 31,250 रुपये प्रति दस ग्राम तक पहुंच गया है। जानकारों की मानें तो सोने-चांदी के धंधे में जब से स्टोरिये शामिल हुए हैं, तब से इन दोनों धातुओं की कीमतों में साल-दर-साल जबरदस्त बढ़ोतरी हो रही है।
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आर्टिफिशियल ज्वेलरी का बढ़ने लगा क्रेज
सोने की कीमतों में हो रही रिकार्ड बढ़ोतरी के चलते लोगों का रुझान अब आर्टिफिशियल ज्वेलरी की तरफ होने लगा है। गृहिणी रितु शर्मा, बृज बाला, पिंकी गुप्ता, मंजू शर्मा, दीक्षा महाजन, पूजा महाजन और ममता इत्यादि ने बताया कि सोने की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते नए गहने बनवाने की बजाय अब आर्टिफिशियल ज्वेलरी से ही काम चलाना पड़ रहा है।

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