
बरोट (मंडी)। चौहारघाटी और छोटा भंगाल क्षेत्र की नदियों में ट्राउट फिश के शिकार पर पांच माह के लिए प्रतिबंध लग गया है। यह प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से लागू होगा। ऐसे में अगली साल फरवरी तक यहां कोई भी ट्राउट का शिकार नहीं कर सकेगा। ब्रीडिंग सीजन के चलते मत्स्य विभाग ने ट्राउट के शिकार पर पाबंदी लगा दी है। आदेशाें का उल्लंघन करने वालाें के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
ब्रीडिंग सीजन के चलते पहली नवंबर से बरोट मत्स्य फार्म की ट्राउट हैचरी में प्रजनन का कार्य शुरू हो गया है। ट्राउट के अंडे देने से लेकर ब्रीडिंग सीजन फरवरी तक चलेगा। इसके चलते विभाग ने ट्राउट के आखेट पर 28 फरवरी तक पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया है। इस बीच कोई भी लंबाडग, ऊहल और अन्य सहायक नालों में भी मछलियों का शिकार नहीं करेगा।
गौरतलब है कि ट्राउट फिश की भारी मांग रहती है। साल के सात माह तक ट्राउट का यहां लगातार शिकार किया जाता है। टनों के हिसाब से ट्राउट का बाहरी राज्यों में निर्यात होता है लेकिन नवंबर से फरवरी तक ट्राउट का ब्रीडिंग सीजन होता है। इसके चलते विभाग ने पांच माह के लिए शिकार पर रोक लगा दी है। मत्स्य विभाग बरोट के फार्म प्रभारी राजेंद्र पाल ठाकुर ने बताया कि 28 फरवरी तक ट्राउट के शिकार पर प्रतिबंध लगा दिया है। यदि कोई अवैध शिकार करता हुआ पकड़ा जाता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। दोषी को जुर्माना और सजा दोनाें हो सकती है।
