न्यांगल और कथियाड़ीवासी लौटे घर

ज्वाली (कांगड़ा)। प्रदेश सरकार और प्रशासन की बेरुखी के चलते आखिरकार तीन सप्ताह बाद न्यांगल व कथियाड़ी गांव के 11 परिवार बुधवार को अपने मकानों में वापस चले गए। न्यांगल व कथियाड़ी गांव निवासी मनमोहन सिंह, सुभाष चंद, खेम चंद, कुशल, छोटा राम, सुषमा देवी, बालकृष्ण, भरती राम, रोहित कुमार, प्रीतम और रघुनाथ ने प्रशासन को कोसते हुए कहा कि प्राकृतिक आपदा के उपरांत डेंजर जोन का हवाला देकर उनके घरों को खाली तो करवा दिया गया, लेकिन उनके रहने, बिजली, पानी और खाने-पीने की कोई उचित व्यवस्था नहीं करवाई। प्रशासन ने मात्र तीन हजार रुपये की आर्थिक सहायता देकर ही अपना पल्लू झाड़ लिया गया। तीन सप्ताह तक उनका हाल तक पूछने की प्रशासन ने जहमत नहीं उठाई। राजनेता मात्र वोटों की रोटियां सेंकने की खातिर ही उनके पास पहुंचे, लेकिन उनको कोई भी मूलभूत सुविधा उपलब्ध नहीं करवाई गई। वहीं, इतने दिन घरों से बाहर रहने के कारण उनकी काफी क्षति हुई है। उन्होंने मणिमहेश लंगर सेवादल समिति और युवा समाज सुधार सभा ज्वाली का आभार प्रकट करते हुए कहा कि सभा की ओर से उनको रहने के लिए तंबू सहित खाने-पीने की सामग्री उपलब्ध करवाई गई। उन्होंने शनिसेवा सदन पालमपुर और समाजसेवी सुरेश शर्मा का गर्म कंबल, कपड़े और बच्चों को वर्दी देने के लिए धन्यवाद किया। वहीं, मणिमहेश लंगर सेवादल समिति के अवतार सिंह, नारायण सिंह निक्का, नायक राम, सोनू मेहरा, डॉ रवि मेहरा, मोहन लाल बग्गा, रोमी कुमार, विनय माही, पुट्टा शर्मा, विशाल मेहरा, जिम्मी कुमार ने न्यांगल और कथियाड़ी गांवों के लोगों को रहने के लिए लगाए गए टैंट उनके चले जाने के बाद समेटे और वापस ज्वाली ले आए।

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