
शिमला। एचआरटीसी के अधिकृत ढाबों में यात्रियों से हो रही लूट खसोट रोकने के लिए पांच माह पूर्व जारी किए गए निर्देशों पर तो अमल हुआ नहीं, निगम प्रबंधन ने खानापूर्ति के लिए एक बार फिर थोड़ा बदलाव कर नए निर्देश जारी कर दिए हैं। पांच माह पूर्व मई माह में ‘अमर उजाला’ ने निगम से अधिकृत ढाबों की खस्ताहाल स्थिति को लेकर खबरें प्रकाशित की थीं, जिसके बाद निगम प्रबंधन ने कंडक्टरों को ढाबों की रेट लिस्ट उपलब्ध करवाने, ढाबों के बाहर मोटे अक्षरों में रेट लिस्ट लगाने और नियमित तौर पर ढाबों के निरीक्षण के निर्देश दिए थे। बावजूद इसके व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ। पांच माह बाद ‘अमर उजाला’ ने पुन: इस मुद्दे को उठाया तो निगम प्रबंधन ने पुराने निर्देशों में थोड़ा फेरबदल कर ताजा निर्देश जारी कर दिए हैं। इन निर्देशों के बाद भी स्थिति में सुधार की संभावनाएं कम ही दिखाई दे रही हैं।
कहां से आएंगे डाक्टर और खाद्य निरीक्षक?
ढाबों में भोजन की गुणवत्ता और सफाई जांचने के लिए तीन सदस्यीय कमेटी के गठन के निर्देश दिए गए हैं। कमेटी में एचआरटीसी अधिकारी के साथ डाक्टर और खाद्य निरीक्षक को सदस्य बनाया जाना है। लेकिन ढाबों के निरीक्षण के डाक्टर और खाद्य निरीक्षक आएंगे कहां से? यह बड़ा सवाल है।
डीसी का काम कैसे करेंगे डीएम?
खाद्य वस्तुओें के दाम निर्धारित करने का काम जिला उपायुक्त का होता है। निगम प्रबंधन की ओर से ढाबा संचालकों के साथ डीएम (मंडलीय प्रबंधक) को रेट तय करने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे में डीसी का काम डीएम कैसे करेंगे, यह भी बड़ा सवाल है।
मंडलीय प्रबंधकों को सौंपी जिम्मेदारी : बत्ता
एचआरटीसी से अधिकृत ढाबों के निरीक्षण की जिम्मेदारी मंडलीय प्रबंधकों को दी गई है। यदि संभव हो तभी निरीक्षण के लिए डाक्टरों और खाद्य निरीक्षकों का सहयोग लिया जा सकता है। जिला उपायुक्तों की ओर से तय किए गए खाद्य वस्तुओं के दाम ही निगम के अधिकृत ढाबों के लिए तय किए जा सकते हैं।
