
धर्मशाला। अचानक भूस्खलन से प्राकृतिक आपदा का शिकार हुए कोटला के साथ लगते न्यांगल गांव के बाशिंदे करीब दो साल तक अपने घर नहीं लौट सकेंगे। भू जल वैज्ञानिकों की रिपोर्ट को आधार मानें तो यहां की जमीन फिलहाल रहने लायक नहीं है। केंद्रीय भूजल बोर्ड ने प्रभावित गांव का मौका मुआयना करने के बाद जिला प्रशासन को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। बोर्ड ने प्रशासन के माध्यम से आगामी दो मानसून सीजन तक एहतियात बरतने की सलाह दी है। रिपोर्ट के मुताबिक न्यांगल के साथ लगती पूरी पहाड़ी की चिकनी मिट्टी में दरारें आ गई हैं। जमीन में क्रेक्स की वजह से पहाड़ी धीरे-धीरे दरक रही है। बरसात के मौसम में यहां
स्थिति और भी खतरनाक हो सकती है। लिहाजा बोर्ड ने उपायुक्त कांगड़ा सी पालरासु के साथ रिपोर्ट के तथ्य साझा कर यहां पचास मीटर ऊपर और पचास मीटर नीचे तक की जमीन में किसी को भी न जाने की
हिदायत दी है।
धर्मशाला स्थित केंद्रीय भूजल बोर्ड उत्तरी क्षेत्र निदेशालय के प्रभारी जेएस शर्मा ने शनिवार को जिला प्रशासन को अपनी रिपोर्ट सबमिट कर दी। उन्होंने बताया कि आमतौर पर चिकनी मिट्टी बहुल क्षेत्रों में इस तरह की समस्या देखने को मिलती है। इलाका पहाड़ी होने के कारण स्थिति संवेदनशील हो सकती है। उन्होंने कहा कि आगामी मानसून के दो सीजन तक इस क्षेत्र का परीक्षण करना होगा। फिलहाल यहां पुनर्वास संभव नहीं है।
प्रभावितों का किया जाएगा
पुनर्वास : उपायुक्त
उपायुक्त कांगड़ा सीपालरासु का कहना है कि केंद्रीय भूजल बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। इसके मुताबिक यहां की जमीन फिलहाल लोगों के रहने लायक नहीं है। इलाके का जियोलॉजिकल सर्वेक्षण भी होगा। फिलहाल प्रभावितों को अस्थायी तौर पर यहां से शिफ्ट किया गया है। इनके समुचित पुनर्वास के लिए सरकार से बात की जाएगी। प्रशासन की ओर से प्रभावितों को पूरी मदद मिलेगी।
