न पानी मीटर लगाए, न राशि लौटा रहा एमसी

शिमला। नगर निगम ने शहर के सैकड़ों लोगों से पानी मीटर लगाने की एवज में 500 रुपये वसूल लिए लेकिन दो साल बाद भी मीटर नहीं लगाए हैं। लोगों ने थक हारकर मीटर खुद ही लगा लिए लेकिन निगम अब इन लोगों की जमा राशि नहीं लौटा रहा है। दो साल से लोग राशि वापस मांग रहे हैं। दो साल पहले करीब 200 लोगों ने पानी कनेक्शन लगाने के लिए नगर निगम में आवेदन किया था। आवेदकों से एक हजार रुपये सिक्योरिटी और 500 रुपये मीटर चार्ज वसूला गया था। इस दौरान निगम के पास पानी के मीटर कम पड़ गए थे। निगम ने फरमान जारी कर लोगों को खुद मीटर खरीद कर लगाने के लिए कहा था। पानी कनेक्शन लेने के चक्कर में लोगों ने भी बाजार से मीटर खरीद कर कनेक्शन लगवा लिए। बाद में जब लोगों ने मीटर चार्ज लौटाने को कहा तो निगम अधिकारी आनाकानी करने लगे। पंथाघाटी की रेखा शर्मा, विकासनगर के प्रेम प्रकाश ने बताया कि कई बार राशि लौटाने के लिए कहा गया लेकिन निगम अधिकारी एक नहीं सुनते। निगम अभियंता विजय गुप्ता ने बताया कि निगम में पानी मीटर खत्म होने के चलते इन लोगों ने खुद मीटर लगा लिए थे। मीटर लगाने के लिए जमा करवाई गई राशि के लिए आवेदन करने वाले लोगों की फाइल प्रक्रिया में है। लेखा शाखा की कुछ आपत्तियों को दूर किया जा रहा है। जल्द ही राशि लौटा दी जाएगी।

पानी बिल फ्लैट तो मीटर लगाना जरूरी क्यों
शिमला। राजधानी में घरेलू उपभोक्ताओं के लिए पानी बिल प्रति माह फ्लैट कर दिया गया है। अब मीटर रीडिंग के हिसाब से पानी बिल नहीं दिया जाता। यह व्यवस्था करने से जहां नगर निगम प्रशासन ने स्टाफ की कमी की किल्लत को दूर कर लिया है, वहीं शहरवासियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी डाल दिया है। पानी कनेक्शन लगाते समय मीटर लगाना अभी भी अनिवार्य किया गया है जबकि मीटर से रीडिंग नहीं ली जानी है। निगम प्रशासन ने मीटर से कनेक्शन धारक की पहचान होने का तर्क देते हुए शहरवासियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ लाद दिया है। पानी कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं को अब भी मीटर के करीब 500 रुपये निगम को चुकाने पड़ रहे हैं।

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