
महादेव (मंडी)। सुंदरनगर में साठ-सतर के दशक में राष्ट्र निर्माण को समर्पित बहुउद्देशीय 990 मेगावाट ब्यास-सतलुज लिंक परियोजना के (बीएसएल) विस्थापितों ने बैठक कर मांगों पर चरचा की। तय हुआ कि लंबित पड़ी मांगों को लेकर विस्थापित बीबीएमबी के अध्यक्ष से मिलेंगे। रोपा विस्थापित संघ के अध्यक्ष निकू राम सैनी ने कहा कि करीब चार दशक बीत जाने के बाद भी बीबीएमबी प्रबंधन और सरकार परियोजना विस्थापितों को मूलभूत सुविधाएं मुहैया करवाने में नाकाम रही है। उन्होंने मांग की कि दशकों पहले परियोजना विस्थापिताें द्वारा कब्जाई गई भूमि को बिलासपुर की तर्ज पर उनके परिवाराें को अलाट करें। साथ ही गृह कर में विस्थापितों को छूट दी जाए।
उन्होंने बताया कि शनिवार को बीबीएमबी के चेयरमैन के सुंदरनगर आने पर उनसे मिलकर मांगों को उठाया जाएगा। विस्थापिताें की मांग के बावजूद प्रदेश सरकार लगातार उनकी अनदेखी करती आ रही है।
पुनर्वास योजना के तहत अन्यत्र कुछ परिवार मुखिया के नाम जमीन देने की घोषणा हुई। लेकिन सरकार ने 1994 में इस पर भी रोक लगा दी। यह आज तक बरकरार है। नतीजतन लंबे समय बाद भी इन्हें विस्थापन का दंश झेलना पड़ रहा है। विस्थापितों को गृह निर्माण के लिए बेकार जमीन आवंटित की है। बैठक में समिति के उपाध्यक्ष रमेश सैनी, कोषाध्यक्ष प्रेम चौहान, महासचिव पूर्ण चंद डोगरा, सहसचिव दीप सैनी, मुख्य सलाहकार दुनी चंद धीमान, कानूनी सलाहकार हिम्मत राम सैनी, दीपक धीमान, आलम चंद, चंद सैनी और नीरज सैनी मौजूद रहे।
