मंत्रों को मिटाने की प्रक्रिया से लोग खफा

मंडी। ग्रीन ट्रिब्यूनल बैंच के आदेशों पर धार्मिक त्रिवेणी रिवालसर में धार्मिक मंत्रों पर चढ़ाए रंगों को हटाने के कार्य पर लोगों ने आपत्ति जताई है। लोगाें का कहना है कि पत्थराें पर लगे रंग को अवैज्ञानिक तरीके से मिटाया जा रहा है। इससे इन ऐतिहासिक स्थलों के स्वरूप बदलने और नष्ट होने का खतरा है। शुक्रवार को इस बारे लोगों ने डीसी के माध्यम से मुख्यमंत्री को इस बाबत ज्ञापन भेजा।
गुरुदास नेगी, कुमार सिंह नेगी, थुप तेन, तारा चंद नेगी और दुर्गा दास ने बताया कि धार्मिक मंत्रों पर चढ़ाए गए रंग को हटाने के लिए रेगमाल और तारपीन का प्रयोग अवैज्ञानिक तरीके से किया जा रहा है। इससे इन धरोहरों के नष्ट होने का खतरा बन गया है। लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं। रिवालसर झील की परिक्रमा में पंचायत लोअर रिवालसर के गेट के बाहर करीब छह फुट ऊंची चट्टान पर गुरु पद्म संभव की प्रतिमा और गुरु अवलोकतेश्वर का मंत्र प्राचीन समय से उकेरा है। इस चट्टान का उल्लेख वर्ष 1120 में मंडी के तत्कालीन अधीक्षक एमरसन ने भी गजेटियर आफ मंडी स्टेट में किया है। इस ऐतिहासिक धरोहर पर चढ़ाए रंग को हटाने के नाम पर इसे खराब करने की चेष्टा की जा रही है। इस बारे ग्रीन बैंच को भी अवगत करवाया जाएगा। लोगाें ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि पुरातत्व विभाग अथवा विशेषज्ञों की राय लेकर ही कार्य शुरू किया जाए।
प्राकृतिक स्वरूप रहेगा बरकरार : अजय
पत्थराें पर उकेरे गए मंत्राें पर चढ़ाए गए रंगों को निकालना नपं रिवालसर के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। नपं के जेई अजय शर्मा ने कहा कि मंत्राें पर रंग काफी पक्का है। ऐसी कोई तरकीब पर मंथन कर रहे हैं जिससे पत्थराें को दोबारा प्राकृतिक रूप में लाया जा सके।

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