
शिमला। नगर निगम महापौर संजय चौहान की अध्यक्षता में मंगलवार को निगम पार्षदों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर शहर के जंगलों को वापस देने की मांग की। सचिवालय पहुंचे निगम पार्षदों ने संविधान के 74वें संशोधन से अवगत कराते हुए वनों को लौटाने की मांग की। चौहान ने मुख्यमंत्री से कहा कि 2011 में भाजपा सरकार ने नगर निगम को 842 हेक्टेयर वन क्षेत्र सौंपा था लेकिन वन अधिकार सरकार के पास ही रखे थे। शहर में 1880 हेक्टेयर वन क्षेत्र है। ऐसे में 2006 से पूर्व की तर्ज पर शहर के 1880 हेक्टेयर वन क्षेत्र को अधिकार सहित निगम को वापस लौटाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वन विभाग वन क्षेत्र से सालाना करोड़ों की आय कर रहा है जबकि निगम को मात्र वनों की रखवाली का काम सौंपा गया। जंगलों और निजी भूमि पर अवैध पेड़ कटान पर नजर रखना निगम की जिम्मेदारी है। इसके अलावा जंगलों में बिना अनुमति मलबा फेंकने वालों के खिलाफ कार्रवाई करना और जुर्माना लगाना सहित वन भूमि पर अवैध निर्माण रुकवाना इनके कार्य क्षेत्र में है। ऐसे में जनहित में सरकार को जंगल निगम को वापस सौंपने चाहिए। इस अवसर पर कांग्रेस पार्षद अर्चना धवन, सुरेंद्र चौहान, सुशांत कपरेट, शशि शेखर चीनू, संजय परमार, प्रवीण कुमार, आलोक पठानिया, कुलदीप ठाकुर, ऊषा लखनपाल, उमा कौशल, दीपक रोहाल, भाजपा पार्षद अनूप वैद, मनोज कुठियाला, शैलेंद्र चौहान, सत्या कौंडल, कुसुम ठाकुर, रजनी सिंह, निर्मला चौहान, कल्याण चंद धीमान, भारती सूद, लक्ष्मी कश्यप और माकपा पार्षद नरेंद्र ठाकुर, दीक्षा ठाकुर व कांता स्याल मौजूद रहे।
