
बागेश्वर। पुंगर घाटी के करुली स्थित प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका पार्वती खेतवाल ने पेशे के प्रति निष्ठा समर्पण और सेवा भाव की मिशाल कायम की है। शिष्यों को काबिल बनाना ही उनकी जिंदगी का मकसद है। लगातार अस्वस्थता के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी, उनके वेतन का एक हिस्सा गरीब बच्चों पर खर्च होता है।
पहाड़ के ग्रामीण स्कूलों की व्यवस्था को लेकर तमाम तरह के सवाल खडे़ हो रहे हैं। ऐसे वक्त में पार्वती खेतवाल जैसी अध्यापिकाआें का समर्पण शिक्षक के प्रति गहरा सम्मान पैदा करता है। ग्रामीणों के अनुसार उनकी दो पुत्रियां हैं, जिनका विवाह हो चुका है। एक साल पहले पति की भी मृत्यु हो चुकी है। 55 वर्षीया पार्वती खेतवाल शुरू से ही अपने कर्तव्य के प्रति समर्पित रही हैं। समय पर स्कूल खोलना और पढ़ाना उनकी दिनचर्या का हिस्सा रहा है। पूर्व में तीन साल तक वह अकेली अध्यापिका थीं। तब उन्होंने अपने निजी खर्च से एक अस्थाई अध्यापक का इंतजाम किया। मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता को एकदम ठीक रखने के लिए वह अपने वेतन से भी खर्च करती हैं। अभी तक वह कई गरीब बच्चों की फीस, पुस्तक ड्रेस आदि का भी खर्च उठा चुकी हैं। ग्राम प्रधान पुष्पादेवी का कहना है कि पार्वती बहन के कामों के कारण ही समाज में उनका काफी सम्मान है। विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था के साथ ही परिसर की खूबसूरती और वहां फूलों, वनस्पतियों की हरियाली उनकी निष्ठा को प्रकट करती है। पूर्व प्रधान गणेश खेतवाल ने बताया कि इस स्कूल की उच्चस्तरीय पढ़ाई का ही नतीजा है कि यहां के कई बच्चों का चयन नवोदय स्कूलों में हो चुका है। इसी कारण उन्हें 2011 में ही राज्य सरकार का शैलेश मटियानी पुरस्कार मिल चुका है। सामाजिक कार्यकर्ता हरीश कालाकोटी और हरीश खेतवाल ने कहा कि पार्वती बहन का स्वास्थ्य अक्सर खराब रहता है। इसके बावजूद उनमें सेवा का जज्बा कम नहीं हुआ। वर्तमान समय में वह इलाज के लिए बाहर गई हैं।
