
हल्द्वानी। जंगलात की जमीन में वन अधिनियम के आड़े आना का रोना सरकारी महकमे रोते हैं, लेकिन सच्चाई कुछ अलग है, जिन सरकारी महकमों को जमीन की जरूरत है, वह ही फाइल दबाए बैठे हैं। तराई पूर्वी वन प्रभाग में वन भूमि हस्तांतरण के 16 प्रस्ताव लंबित हैं, इसमें 12 प्रस्तावक विभाग पर ही लंबित है।
तराई पूर्वी वन प्रभाग में शिक्षा, लोक निर्माण विभाग, एसएसबी, पुलिस, बिजली आदि विभागों ने विभिन्न कामों के लिए जमीन की मांग की थी, पर स्थिति यह है कि इसमें से अधिकांश प्रस्ताव सरकारी महकमों पर ही लंबित हैं, विभाग औपचारिकता पूरी नहीं पाए हैं। प्रभाग ने जो रिपोर्ट तैयार की है, उसमें पता चलता है कि प्रभाग में 16 मामलों में भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया चल रही है, इसमें कार्यालय स्तर पर कोई भी प्रस्ताव लंबित न होने का दावा किया किया गया है। 12 प्रस्ताव ही प्रस्तावक विभाग (प्रयोक्ता एजेंसी) स्तर पर लंबित है। एक भारत सरकार, दो देहरादून स्थित वन विभाग नोडल कार्यालय पर है। डीएफओ डा. पराग मधुकर धकाते कहते हैं कि विभाग कई बार औपचारिकता को पूरी करने में देर करते हैं, इससे जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया लेट होती है। प्रभाग स्तर पर कोई भी प्रस्ताव लंबित नहीं है।
