
रुद्रपुर। एआरटीओ दफ्तर पूरी तरह से ट्रैक्टर-ट्रालियों पर मेहरबान है। नतीजतन मानकों के विपरीत ट्रालियां ट्रैक्टर के साथ यमदूत बनकर सड़कों पर दौड़ रही हैं और लोग दुर्घटना के शिकार हो रहे हैं।
जिले में सिडकुल बनने से पहले ट्राली का उपयोग केवल कृषि कार्य के लिए किया जाता था। मगर सितारगंज और रुद्रपुर में सिडकुल की स्थापना के साथ खनन कार्यों में भी ट्राली का उपयोग होने लगा है। बताया जाता है कि जिले में जितने ट्रैक्टर हैं, उतनी भी ट्रालियां भी है। परिवहन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में 24 हजार ट्रैक्टर हैं, जबकि ट्रालियां केवल 823 ही पंजीकृत हैं। यही नहीं जिले में ट्राली बनाने के लिए कोई अधिकृत नहीं है बावजूद इसके गली-मोहल्लों में ट्राली बनाने का कारोबार तेजी के साथ चल रहा है। विभाग के एआरआई विनोद गुंज्याल ने बताया कि मानक के अनुसार ट्राली की लंबाई करीब साढ़े 11 फीट, चौड़ाई छह फीट और ऊंचाई 36 इंच होती है। बहरहाल इन मानकों से बड़ी ट्राली बनाई जा रही हैं।
