
नूरपुर (कांगड़ा)। अंतरराष्ट्रीय वेट लैंड रामसर साइट (पौंग झील) में हर साल अक्तूबर से फरवरी माह में आने वाले प्रवासी परिंदों की आमद साल दर साल कम होती जा रही है। बीते पांच साल में यहां सर्दियों में डेरा जमाने वाले विदेशी मेहमानों की संख्या में 27 हजार की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, प्रदेश का वन्य प्राणी विभाग दावा कर रहा है कि वह हर साल हजारों की तादाद में आने वाले विदेशी परिंदों की सुरक्षा को लेकर गंभीर रहा है, बावजूद इसके प्रवासी पक्षियों का आंकड़ा गिर रहा है। वर्ष 2009 में करीब डेढ़ लाख की रिकार्ड संख्या में प्रवासी पक्षियों ने पौंग झील में दस्तक दी थी। अगले ही साल 2010 में यह आंकड़ा 1 लाख 45 हजार तक पहुंच गया और वर्ष 2011 में विदेशी मेहमानों की यह तादाद 1 लाख 32 हजार रह गई। इस साल प्रवासी पक्षियों की संख्या में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई। 2012 में यह आंकड़ा 1 लाख 19 हजार 500 तक पहुंच गया। हालांकि, जनवरी 2013 की सालाना गणना में पौंग झील के किनारे 1 लाख 23 विदेशी मेहमानों की उपस्थिति दर्ज की गई, जो पिछले मुकाबले साढ़े 3 हजार ज्यादा रिकार्ड की गई। इसमें विदेशी परिंदों की प्रजातियों का आंकड़ा भी 103 से बढ़कर 113 तक पहुंच गया, लेकिन इस मर्तबा फिर पौंग झील का जलस्तर (1384 फुट) ज्यादा होने के कारण प्रवासी पक्षियों की संख्या में कमी आने की संभावना जताई जा रही है। उधर, वन्य प्राणी विभाग के परिक्षेत्र अधिकारी सवाई लाल ने बताया कि पौंग झील में विदेशी परिंदों की आमद काफी हद तक मौसम में बदलाव के अलावा बांध के जलस्तर में होने वाली अनियंत्रित हलचलों पर निर्भर करती है।
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हर साल अक्तूबर-जून माह में पौंग झील का जलस्तर 1390 फुट के अधिकतम स्तर से 1280 फुट तक पहुंच जाता है। इन अनियंत्रित हलचलों के चलते पौंग का जलस्तर बढ़ने से प्रवासी पक्षी प्रजनन के लिए घरौंदे न मिलने के कारण कुछ समय यहां बिताने के बाद किसी और वेटलैंड की ओर अपना रुख कर लेते हैं। प्रवासी पक्षियों के विचरण, आवास और भोजन प्रक्रिया से छेड़छाड़ जैसे कई कारण इनकी आमद को प्रभावित करते हैं।
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वर्ष संख्या
2009 1,50,000
2010 1,45,000
2011 1,32,000
2012 1,19,500
2013 1,23,000
