
पंडोह (मंडी)। कौन कहता है आसमां में छेद नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है अक्षम माता-पिता ने। अक्षमता भी उनके मजबूत इरादों को तोड़ नहीं पाई। दिन-रात मेहनत कर अपने लाडलों को उन बुलंदियों पर पहुंचा दिया, यहां हर मां-बाप अपने बेटों को देखना चाहते हैं। उनके भविष्य को ऐसे संवारा कि यह दंपति दूसरों के लिए प्रेरणास्रोत बन गया है। पंडोह के बीबीएमबी कालोनी में रहने वाले माता-पिता ने अक्षमता से लड़ कर अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा देने में कोई कसर नहीं छोड़ी है और बेटों के अपने पैरों पर खड़े होने से अक्षम माता-पिता का सपना आखिरकार सच हुआ है। मनमोहन सिंह और कुलविंद्र कौर दोनों शारीरिक रूप से अक्षम है। चलने-फिरने में असमर्थ मनमोहन और कुलविंद्र कौर ने बेटों के लिए दिन रात एक करते हुए उनकी शिक्षा-दीक्षा में अक्षमता को आड़े नहीं आने दिया। माता सिलाई-कढ़ाई का काम करती है और पिता बीबीएमबी में बेलदार हैं।
इन्होंने बड़े बेटे अमिंद्र सिंह और छोटे बेटे करणदीप सिंह को सीआईएचएम चंडीगढ़ में होटल मैनेजमेंट का 5 साल का कोर्स करवाया। इस उम्मीद के साथ कि बच्चे हमें किसी से कम न समझें और हमारी अक्षमता इनके उज्ज्वल भविष्य में बाधक न बने। उनकी उम्मीद पूरी हुई। अब बड़ा बेटा अमिंद्र सिंह यूकेमें रस-बस गया है और छोटा बेटे करणदीप ने पंडोह के तीन पीपल में एक आधुनिक किंग बर्गर स्टाल खोला है। दोनों बेटे सेटल होने से अक्षम माता-पिता काफी उत्साहित है। मनमोहन सिंह और कुलविंद्र कौर का कहना है कि बेटों के भविष्य को लेकर जो सपने उन्होंने देखे थे, आज वे साकार हो गए हैं।
स्थानीय पंचायत प्रधान नरेंद्र पाल वैद्य ने बर्गर स्टाल का शुभारंभ करते हुए कहा कि आज के जमाने में सरकारी नौकरी मिलना किसी सपने जैसा है। यदि आप के पास हुनर है और कुछ करने का संकल्प है तो स्वरोजगार में ही अपना भविष्य तलाशें।
