
ज्वालामुखी (कांगड़ा)। नंगे-नंगे पांव मैया अकबर आया सोने का छत्र चढ़ाया… यह मां ज्वाला के दर पे प्रचलित भेंट है, जो बयां करती है कि नंगे पांव महाराजा अकबर मां के दरबार में पहुंचा था। वहीं नवरात्र में मात्र 500 मीटर के रास्ते को भी पैदल तय करने में कई वीवीआईपी व अन्य लोग गुरेज करते दिखे। बेबस मंदिर प्रशासन वाहनाें को आने की स्वीकृति प्रदान करता रहा।
विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ श्री ज्वालामुखी में रविवार को शारदीय आश्विन नवरात्र का महापर्व तो विधिवत संपन्न हो गया। लेकिन, इतने बड़े आयोजन में रहीं कमियों को उजागर करते हुए कई सवाल भी छोड़ गया। सवाल उठ रहा है कि नवरात्र के दौरान ज्वालाजी शक्तिपीठ में श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिए जाने वाले निर्णय भी आखिर क्यों बौने हो गए? धारा 144 में मंदिर में भजन संध्या के आयोजन को स्वीकृति देना, मुख्य मंदिर मार्ग पर नवरात्र के दौरान दर्जनों वाहनाें को मंदिर तक पहुंचने की स्वीकृति देना, सफाई व्यवस्था पुख्ता न होना, मुख्य मंदिर मार्ग नंबर एक पर हर पुलिस बूथ के बावजूद हर आने जाने वाले वाहन की चेकिंग व एंट्री न करना। इस तरह के कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर शारदीय नवरात्र में मंदिर न्यास की ओर से कोई भी गंभीरता न दिखाना, मंदिर न्यास की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह लगा गया।
पुख्ता जानकारी के मुताबिक मुख्य मंदिर मार्ग नंबर एक पर नवरात्र के दौरान पुलिस बूथ होने के बावजूद न तो किसी आने जाने वाले वाहन की चेकिंग की गई और न ही इन वाहनों की एंट्री मंदिर के पास मौजूद है। वहीं, आम श्रद्धालुओं को ढोलकी चिमटा भी मंदिर तक ले जाने पर पूर्णतय: प्रतिबंध लगाया गया। वहीं, इस बारे में वरिष्ठ मंदिर न्यास सदस्य सुरेंद्र काकू का कहना है कि नवरात्र के दौरान मुख्य मंदिर मार्ग पर वाहनों पर प्रतिबंध लगाना चाहिए और पुलिस बूथ पर हर आने जाने वाले वाहन की एंट्री होनी चाहिए। मंदिर अधिकारी सुरेंद्र शर्मा का कहना है कि नवरात्र शांतिपूर्व संपन्न हुए हैं। मंदिर मार्ग पर नवरात्र में आए हुए प्रत्येक वाहन को परमिशन दी गई है। बिना परमिशन कोई भी वाहन नवरात्र के दौरान नहीं आया है।
