
बागेश्वर। ग्यारह साल पहले गैरसैंण के आदिबद्री क्षेत्र में 12 स्कूली बच्चों को आदमखोर तेंदुए ने मार डाला तो शिक्षक लखपत सिंह रावत ने आदमखोरों को मारने का संकल्प लिया। लखपत सिंह पहले से अच्छे निशानेबाज थे। ग्यारह सालों के अंतराल में उन्होंने 44 आदमखोर मार गिराए हैं।
गैरसैण के ग्वाड़ गांव में 1964 में जन्मे लखपसिंह पेशे से शिक्षक हैं और वर्तमान में गैरसैंण ब्लाक में सर्व शिक्षा के समन्वयक हैं। उन्होंने छात्र जीवन में ही एसएसबी में गुरिल्ला प्रशिक्षण के दौरान फायरिंग सीखी। बाद में शिक्षक बने और 1998 में फिर से जिला प्रशासन के सहयोग से फायरिंग का प्रशिक्षण लिया। बाद में वन विभाग, शिक्षा विभाग और प्रशासन की सहमति से उन्हें तेंदुए के सफाये को बुलाया जाने लगा। पिथौरागढ और ऊधमसिंह नगर को छोड़कर राज्य के सभी जिलों में अभी तक वह 44 आदमखोरों को ढेर कर चुके हैैं। उन्होंने 15 मार्च 2002 कोे पहला आदमखोर तेंदुआ आदिबद्री में मार गिराया।
कैसे बचें गुलदारों के हमलों से
-घरों के पास 20 मीटर की दूरी तक झाड़ी न रखें
-रात के वक्त बच्चों को गोशाले में न ले जाएं
-समूह में काम करते वक्त औरतें बारी बारी से निगरानी करें
-बाहर शौच को जाएं तो मुंह झाड़ी की तरफ हो
-अंधेरा होने के बाद घर के बाहर मुखौटे पहन लिया करें
– नजर बचाकर पीछे से हमला करता है गुलदार
