जिमीकंद और अदरक की खेती को प्रोत्साहन

टिहरा (मंडी)। किसानों की फसलों को बंदराें और जंगली जानवरों से बचाने के लिए कृषि विभाग ने नौणी विश्वविद्यालय से नेरी रिसर्च सेंटर के माध्यम से एक डाक्यूमेंट तैयार किया है। किसानों को ऐसी फसलें उगाने के लिए आत्मा प्रोजेक्ट के तहत प्रोत्साहन दिया जाएगा, जिन्हें बंदर या जंगली जानवर नष्ट नहीं करते हैं। जिले के धर्मपुर विकास खंड की डरवाड़ ग्राम पंचायत के किसानों ने इसी सीजन में अपने स्तर पर इस तरह की फसलें उगानी शुरू कर दी हैं। वर्ष 2012 में इन पंचायतों में किसान क्लबों और ग्रामीण विकास समितियों का गठन किया गया। इन्हें गठित करने में साक्षरता समिति एवं किसान सभा से जुड़े स्थानीय निवासी भूपेंद्र सिंह ने मुख्य भूमिका निभाई। उन्होंने किसानों को अपने खेतों को खाली छोड़ने की बजाए उनमें हल्दी, जिमीकंद, कचालू, अदरक और कोदरा की फसलें उगाने के लिए प्रेरित किया। इन फसलों को बंदर और जंगली जानवर कोई हानि नहीं पहुंचाते हैं। किसान क्लबों और विकास समितियों ने कृषि विभाग से 50 क्विंटल हल्दी बीज की मांग की। जिस पर विभाग ने उन्हें 20 क्विंटल बीज मुहैया करवाया। किसानों ने आत्मा प्रोजेक्ट के तहत उपायुक्त मंडी से जिमीकंद का बीज उपलब्ध करवाने की मांग की। उन्हें 20 हजार रुपये का बीज उपलब्ध करवाया गया। जिमीकंद की खेती के लिए लिए किसानों ने बिलासपुर जिले के जुखाला में प्रशिक्षण प्राप्त किया। वहां से उन्हें तीन क्विंटल बीज भी दिया गया। किसानों ने अपने खेतों में बड़े स्तर पर कचालू, अदरक की बिजाई भी की। कुछ किसानों ने भिंडी और कोदरे की खेती शुरू की है। किसान क्लब और विकास समितियों से जुड़े अनंत राम, सुखराम, मेहर सिंह, ओमचंद, रामस्वरूप, राजकुमार, व्यास देव, रणवीर शास्त्री, कृष्णदेव, नरेंद्र कुमार, बलवीर सिंह, कुलदीप सकलानी, प्रेम सिंह, शिवराम, रूपलाल गुलेरिया, केहर सिंह, देवराज, बेली राम, टेकसिंह, कंवन सुशील, रूप लाल बिष्ट आदि ने नई तकनीक अपना कर अपने खेतों को फिर से हरा भरा कर दिखाया। धर्मपुर विकास खंड अधिकारी सुरेश कुमार और हेमराज ने भी फसलों का निरीक्षण किया। किसानों ने आत्मा परियोजना के तहत वैकल्पिक फसलों को उगाने के लिए अधिक बीज मुहैया करवाने और प्रशिक्षण देने की मांग की है। समिति ने विभाग और उपायुक्त मंडी को प्रस्ताव भेजा है।

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