
रामनगर। ये लोक (जनता) और लोकसेवकों (वन विभाग के कर्मचारी) के बीच की लड़ाई है। दोनों की यूनियनें हैं और अपनी-अपनी ताकत भी। कोई हार मानने को तैयार नहीं। लड़ाई और वैचारिक मतभेद के बीच का प्रमुख कारण है एसडीओ, एक ग्रामीण के बीच का विवाद। जिसकी फाइल इस समय पुलिस की टेबल पर खुली है। इस लड़ाई का रामनगर पिछले एक पखवाड़े से प्रमुख केंद्र बना है। सिर्फ दो लोगों के बीच के विवाद में दो पक्षों के सैकड़ों लोग/कर्मचारी एक-दूसरे के दुश्मन बने हुए हैं।
एक तरफ ईको सेंसिटिव जोन संघर्ष समिति ने वन विभाग के खिलाफ आंदोलन की धमकी दे रखी है तो दूसरी ओर वन कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने भी जनता के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। असल में तेंदुए के आतंक के दौरान एसडीओ जीएस कार्की और ग्रामीण विक्रम सिंह के बीच एक पखवाड़ा पहले कथित विवाद हुआ था। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर मारपीट का आरोप लगाकर मुकदमा दर्ज करा रखा है।
इसी के बाद जनता और वन विभाग आमने-सामने हैं। एक-दूसरे पर खूब छींटाकशी भी चल रही है। ग्रामीण यह कहते हैं कि विक्रम के साथ मारपीट करने वाले दोषी कर्मचारियों पर कठोर कार्रवाई की जाए तो वन विभाग कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति का कहना है कि ग्रामीणों के दबाव में आकर जो मुकदमे वनकर्मियों पर लगाए गए हैं उन्हें निरस्त किया जाए। एसडीओ के साथ मारपीट करने वालों को सजा दी जाए। इस लड़ाई के बीच का रास्ता अभी तक नहीं निकला है। जिन्हें सरकार ने जनता की सेवा का दायित्व सौंपा है एक तरफ वो जनता के लिए मुट्ठी तानकर खड़े हैं तो जिस जनता के लिए जनसेवक रखे गए हैं, उनके लिए लोग सीना ताने हैं। इन संगठनों में जो हैं वो एक-दूसरे के विरोधी नहीं, मगर फिर भी विरोध में खड़े हैं वो भी सिर्फ एक दिन की कथित लड़ाई के के लिए। यह गतिरोध आखिर कौन दूर करेगा। क्योंकि प्रशासनिक स्तर से अब तक इस मामले में चुप्पी है।
