
मुल्थान (कांगड़ा)। …अगर छोटा भंगाल स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला छेरना में सेवाएं दे रहे अध्यापक समय पर स्कूल पहुंचते तो शायद यह हादसा न होता। जिस समय स्कूल में चहारदीवारी और गेट गिरा, उस समय अध्यापक स्कूल ही नहीं पहुंचे थे। न तो कोई स्कूल का अन्य कर्मचारी मौके पर था। इस कारण बच्चे बिना रोक-टोक दीवार के साथ खेल रहे थे। इसी दौरान दीवार गिरी और बच्चे मलबे में दब गए।
घटनास्थल पर स्थानीय लोगों की नजर नहीं पड़ती तो शायद बच्चों की जान बचाना मुश्किल हो जाता। मलबा गिरने के कारण दोनों बच्चे खून से सन गए थे। ग्रामीणों ने बताया कि जब अध्यापकों को इसकी सूचना दी गई तो वे पीएचसी में भी बच्चों को देखने नहीं आए। इससे साफ जाहिर है कि अध्यापकों को स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की फिक्र ही नहीं है। इसी कारण अध्यापकों ने हादसे को अनदेखा कर दिया है। पीएचसी के प्रभारी डा. विनय ठाकुर ने बताया कि अंकुश के सिर पर चोटें आई हैं, जबकि छात्रा शालू देवी की दोनों बाजुओं की हड्डियां टूट गई हैं। अभिभावकों ने अध्यापकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग शिक्षा विभाग से की है। उधर, बीपीईओ दलजीत सिंह ने बताया कि मामले में निष्पक्ष जांच के आदेश दे दिए हैं। वहीं, प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक भजन सिंह ने बताया कि उन्हें मामले के बारे में कोई जानकारी नहीं है। बीपीईओ से जानकारी लेने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
चार माह पहले बने गेट के निर्माण पर सवाल
स्थानीय हाइडल प्रोजेक्ट की मदद से बनाए गए इस गेट और बाउंड्री वाल का निर्माण चार माह पूर्व ही हुआ था। ऐसे में चार माह के बीच ही गेट और दीवार का गिरना घटिया निर्माण की ओर इशारा करता है। साथ ही इस बात की भी पोल खोलता है कि शैक्षणिक संस्थान में जहां छोटे बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं वहां निर्माण कार्य पर किसी तरह का चेक नहीं था। स्थानीय पंचायत के पूर्व उप प्रधान हरिराम तथा स्कूल प्रबंधन कमेटी के प्रधान शालिग राम ने निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए इसकी जांच करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि बच्चों को पिलरों के नीचे से बमुश्किल से निकाला गया। अगर लोग मौके पर नहीं होते तो कुछ भी हो सकता था।
