
मुल्थान (कांगड़ा)। छोटा भंगाल स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला छेरना में जिस चहारदीवारी का मलबा बच्चों पर आ गिरा, वह दीवार लगभग चार महीने पहले ही बनकर तैयार हुई थी। जबकि गेट का निर्माण भी दीवार के साथ ही किया गया था। ऐसे में सवाल उठता है कि इतने कम समय में दीवार और गेट कैसे ढह गया? जाहिर है निर्माण में या तो घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया या फिर इसका निर्माण सुरक्षा के तहत नहीं हुआ। मौके पर स्थानीय लोग नहीं होते तो यहां एक बड़ा हादसा हो सकता था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक दोनों बच्चे पिलरों के नीचे बुरी तरह से दब गए थे, जिन्हें बमुश्किल सुरक्षित निकाला गया।
जानकारी के मुताबिक स्कूल में करीब 25 बच्चे अध्ययनरत हैं। अगर अन्य बच्चे भी दीवार के साथ होते तो हादसा और बड़ा हो सकता था। हालांकि स्कूल शुरू होने का समय सुबह 10 बजे निर्धारित है, लेकिन बच्चे पहले ही स्कूल पहुंचे गए थे। लेकिन हादसे के बाद जब बच्चों को बरोट स्थित पीएचसी ले जाया गया तो अध्यापक उनका हाल जानने के लिए भी नहीं पहुंचे। इससे स्थानीय लोगों में अध्यापकों के प्रति गहरा रोष है। सुबह के समय स्कूल में कोई न होने के कारण बच्चे बेरोक-टोक दीवार के साथ खेल रहे थे। इसी दौरान दीवार गिरी और बच्चे मलबे में दब गए। घटनास्थल पर स्थानीय लोगों की नजर नहीं पड़ती तो शायद बच्चों की जान बचाना मुश्किल हो जाता। ग्रामीणों ने बताया कि जब अध्यापकों को इसकी सूचना दी गई तो अध्यापक पीएचसी में भी बच्चों को देखने नहीं आए। उधर, पीएचसी के प्रभारी डा. विनय ठाकुर ने बताया कि अंकुश के सिर पर चोटें आई हैं जबकि छात्रा शालू देवी की दोनों बाजुओं की हड्डियां टूट गई हैं।
उधर, बीपीईओ दलजीत सिंह ने बताया कि मामले में निष्पक्ष जांच के आदेश दे दिए हैं। वहीं, प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक भजन सिंह ने बताया कि उन्हें मामले के बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि बीपीओ से मामले की जानकारी जुटाकर ही कुछ कहा जा सकता है।
हाइडल प्रोजेक्ट की मदद से बना था गेट
स्थानीय हाइडल प्रोजेक्ट की मदद से बनाए गए इस गेट और बाउंड्री वाल का निर्माण चार माह पूर्व ही हुआ था। स्थानीय पंचायत के पूर्व उप प्रधान हरिराम तथा स्कूल प्रबंधन कमेटी के प्रधान शालिग राम ने निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए इसकी जांच करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि बच्चों को पिलरों के नीचे से बमुश्किल से निकाला गया। अगर लोग मौके पर नहीं होते तो कुछ भी हो सकता था।
