
धर्मशाला। कार खरीदने के बाद जबरन वाहन उठाने और उपभोक्ता को प्रताड़ित करने के एक मामले में धर्मशाला स्थित कंज्यूमर कोर्ट ने टाटा मोटर्स लिमिटेड फाइनांस सर्विसिज के एमडी को गिरफ्तारी वारंट जारी करने के आदेश दिए हैं। उपभोक्ता फोरम ने फैसला सुनाया है कि अगर निर्धारित अवधि तक कंपनी ने उपभोक्ता को हर्जाना अदा नहीं किया तो संबंधित कंपनी के एमडी की गिरफ्तारी की जाए।
जानकारी के अनुसार ज्वालामुखी निवासी राजेंद्र कौशल पुत्र हरबंस लाल ने टाटा इंडिगो कार के लिए 4 लाख 48 हजार का लोन लिया था। प्रतिमाह 10 हजार 135 रुपये ईएमआई निर्धारित की गई। कंपनी ने इसके लिए उपभोक्ता से एडवांस चेक लिए थे। लेकिन कंपनी मनमर्जी से हर माह 15 से 16 हजार के बीच चेक लगाती रही, जो बाउंस हो गए। इसके बाद एक मई 2008 को फाइनांस कंपनी के कर्मचारी उपभोक्ता की कार जबरन उठाकर ले गए। जबकि ईएमआई के हिसाब से उपभोक्ता के अकाउंट में पर्याप्त राशि जमा थी। इस पर राजेंद्र कौशल ने देहरा सिविल कोर्ट में फाइनांस कंपनी के खिलाफ केस किया। कोर्ट ने 29.08.2008 को वाहन रिलीज करने के आदेश दिए। राजेंद्र कौशल के अधिवक्ता विनय सोनी ने बताया कि इसके लिए हुई मानसिक प्रताड़ना के चलते उपभोक्ता ने कंज्यूमर कोर्ट में केस दायर किया। अदालत ने 1 जून 2010 को कंपनी को 20 हजार हर्जाना, 15 हजार रुपये अतिरिक्त तथा 5 हजार रुपये कोर्ट खर्च के रूप में कुल 40 हजार रुपये अदा करने के ओदश दिए। लेकिन कंपनी ने इन आदेशों का पालन नहीं किया और अवमानना का मामला दायर करने पर सोमवार को उपभोक्ता अदालत ने एमडी के गिरफ्तारी वारंट जारी करने के आदेश दिए। साथ ही संबंधित कंपनी को 19 नवंबर तक देय राशि उपभोक्ता के अकाउंट में जमा करने के आदेश दिए गए हैं। आदेशों की अवहेलना पर पुलिस को गिरफ्तारी के आदेश दिए गए हैं।
