
नौहराधार (सिरमौर)। रणफुआ बस हादसा जबड़ोग गांव को गहरे जख्म दे गया है। शुक्रवार को गांव के पैतृक घाट पर एक साथ 12 ग्रामीणों की चिताएं जलाई गई।
जबड़ोग गांव में किसी ने अपना बेटा खोया तो किसी ने पति। किसी ने भाई खोया तो किसी ने पिता। पूरे गांव के लोगों का रो रोकर बुरा हाल है। गांव में कम ही ऐसे परिवार बचे हैं जो शोकाकुल परिवार को ढांढस बंधा सके। समीप के पैतृक घाट में जब एक साथ 12 चिताएं जली तो ग्रामीणों की आँखाें में आंसू थे और अपनों को खोने का गम। चाहे मृतक 17 वर्षीय राजीव हो या फिर 47 वर्षीय कंठी राम। 18 वर्ष के यशपाल और 34 वर्ष के दिलीप सिंह के शव को देखकर परिजन बार-बार बिलख रहे थे।
शवों के अंबार को देख ऐसा लग रहा था मानों शमशान घाट भी छोटा पड़ गया है। कभी न भूलने वाला यह हादसा मृतकों के परिजनों को गहरे जख्म दे गया। छोटे-छोटे बच्चे अपने पिता और भाई को शवों के बीच तलाश रहे थे। उनकी समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर यह क्या हो रहा है। कई बहनें रो रोकर कह रही थी कि उनके भाई ने उनसे दोबारा आने का वायदा किया था लेकिन वह उसे अधूरा छोड़कर हमेशा के लिए चल बसे। कई बुजुर्ग महिलाओं को सांत्वना दे रहे थे।
