
मंडी। बारात ले जाने के लिए बस न भेजना हिमाचल पथ परिवहन निगम को महंगा पड़ा। जिला उपभोक्ता फोरम ने निगम को उपभोक्ता की अग्रिम राशि 4625 रुपये ब्याज सहित लौटाने का फैसला सुनाया। इसके अलावा निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक सरकाघाट की सेवाओं में कमी के कारण उपभोक्ता को हुई परेशानी के बदले उन्हें अपनी जेब से उपभोक्ता के पक्ष में 10,000 रुपये हर्जाना और 4000 रुपये शिकायत व्यय भी अदा करने के आदेश दिए।
जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष जेएन यादव और सदस्यों रमा वर्मा एवं लाल सिंह ने सरकाघाट तहसील के बटोह (मसेरन) गांव निवासी रमेश शर्मा पुत्र जिंदू राम की शिकायत को उचित मानते हुए हिमाचल पथ परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक तथा सरकाघाट डिपो के क्षेत्रीय प्रबंधक को उक्त अग्रिम राशि उपभोक्ता के पक्ष में 9 प्रतिशत ब्याज दर सहित अदा करने का फैसला सुनाया। अधिवक्ता पुष्प राज शर्मा के माध्यम से फोरम में दायर शिकायत के अनुसार उपभोक्ता के बेटे नवीन कुमार शर्मा की शादी 6 मई 2013 को होनी तय हुई थी। बारात ले जाने के लिए उन्होंने निगम के सरकाघाट डिपो में अग्रिम राशि जमा करवा कर 42 सीटों की बस की बुकिंग करवाई थी। बस को शादी वाले दिन 3 बजे बारात ले जाने के लिए पहुंचना था। लग्न का समय 5 बजे का निश्चित था और बारात को बटोह से नैना देवी जाने के लिए डेढ़ घंटे का समय लगना था। निगम बस को तय समय पर पहुंचाने के लिए नहीं भेज सका, तब तक बारात और बैंड ले जाने के लिए उपभोक्ता को 6 टैक्सियां किराये पर ले जानी पड़ी। बस करीब पौने पांच बजे बारात लेने के लिए आई। ऐसे में उपभोक्ता ने निगम की सेवाओं में कमी के चलते उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज करवाई थी। परिवहन निगम ने फोरम की कार्रवाई में भाग नहीं लिया। जिसके चलते एकतरफा कार्रवाई करते हुए फोरम ने अपने फैसले में कहा कि सबूतों से यह साबित हुआ है कि निगम निर्धारित समय पर बस भेजने में असफल रहा जो उनकी सेवाओं में कमी को दर्शाता है। इसके अलावा क्षेत्रीय प्रबंधक अपनी ड्यूटी का दायित्व के साथ निर्वहन नहीं कर सका। जिसके चलते उन्हें अपनी जेब से उपभोक्ता के पक्ष में हर्जाना देने के अलावा संयुक्त रूप से राशि ब्याज सहित लौटाने और शिकायत व्यय भी अदा करने का फैसला सुनाया।
