
रुदपुर। जमीन को उपजाऊ बनाने वाले केंचुए और मित्र कीटों पर भी केमिकलयुक्त पानी का असर दिख रहा है। इससे वे मरने लगे हैं और दूषित पानी से अनाज का स्वाद भी फीका रहा है। इसका सबसे ज्यादा असर धान पर पड़ा है।
सिडकुल से छोड़े जा रहे जहरीले पानी का असर खेती पर भी पड़ा है। सबसे अधिक धान की फसल प्रभावित हुई है। चांदी जैसी चमक के कारण तराई का धान दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। किसानों का कहना है कि दूषित पानी की वजह से धान की चमक लगातार फीकी होती जा रही है और स्वाद में भी कड़वाहट आ रही है। कड़वाहट आने से चावल के दाम कम मिल रहे हैं। किसान बताते हैं कि जहरीले पानी से मित्र कीट कम हो गए हैं। बगवाड़ा के किसान मनोज कुमार गुप्ता ने बताया कि दूषित पानी के खेतों में पहुंचने से धान की चमक फीकी होने लगी है। चावल स्वाद में भी कड़वा लग रहा है। इस कारण मंडी में किसानों को धान का उचित दाम तक नहीं मिल पा रहा है। भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह यादव का कहना है कि अधिकांश फैक्ट्रियां बोरिंग कर पानी जमीन में छोड़ रही हैं। इससे हरियाली तो नष्ट हो रही है, साथ ही भूजल दूषित होने से इसका असर फसल की उत्पादकता पर पड़ रहा है।
