सैंपल रिजेक्ट, फिर भी खरीदे गए एंकल बूट

शिमला। पूर्व भाजपा सरकार के समय हुए हिमाचल पुलिस के एंकल बूट खरीद मामले में विजिलेंस जांच में नया खुलासा हुआ है। तत्कालीन खरीद कमेटी के अध्यक्ष पूर्व आईजी जोगराज ठाकुर की अध्यक्षता वाली कमेटी के समक्ष टेक्निकल बिड खोली गई। कमेटी ने पाया कि उनके समक्ष जो जूतों के सैंपल रखे गए वे टेस्ट रिपोर्ट के साथ सील्ड नहीं थे। इसके बाद कमेटी ने कुछ फर्मों के सैंपल को रिजेक्ट कर दिया। कमेटी ने आगामी कार्रवाई के लिए अपनी कार्रवाई रिपोर्ट एडीजीपी हेडक्वार्टर को भेज दी थी। विजिलेंस की ओर से पुलिस मुख्यालय से जब्त किए रिकॉर्ड में यह बात सामने आई है। पूर्व आईजी जोगराज ठाकुर की अध्यक्षता वाली इस कमेटी ने सैंपल रिजेक्ट करने के बावजूद कंपनियों से बूटों की खरीद की। फाइनेंशियल बिड और सप्लाई ऑडर को किन अधिकारियों के कहने पर फाइनल किया गया इन बिंदुओं पर भी विजिलेंस जांच कर रही है। करीब 81 लाख की बूट खरीद से जुड़े सभी अधिकारियों के बयान दर्ज करने के लिए विजिलेंस खाका तैयार कर रही है। संबंधित अधिकारियों को बयान दर्ज करने के लिए किस तारीख के समन जारी करने हैं, इस बारे में अंतिम निर्णय लिया जा रहा है। इसमें पूर्व डीजीपी, एडीजीपी, आईजी सहित कई खरीद से जुड़े कई अधिकारियों व कर्मचारियों के बयान दर्ज होने हैं। तब विपक्षी दल कांग्रेस ने राज्य सरकार के खिलाफ चार्जशीट राष्ट्रपति को सौंपी और आरोप लगाया कि इस खरीद में घोटाला हुआ है, क्योंकि ज्यादा रेट पर जूते खरीदे गए। बाद में कांग्रेस ने सत्ता में आने पर चार्जशीट को जांच के लिए विजिलेंस को सौंप दिया।

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पुलिस मुख्यालय से रिकॉर्ड जब्त
विजिलेंस ने पुलिस मुख्यालय से बूट खरीद से संबंधित सभी दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए हैं। विजिलेंस की जांच टीम अब उन दस्तावेजों को खंगालने में लगी हुई है। बूट की खरीदारी में कहां अनियमितताएं हुई हैं दस्तावेजों की जांच के बाद ही विजिलेंस किसी नतीजे पर पहुंच सकती है।

सप्लाई ऑर्डर पर होते हैं डीजी के साइन
विभाग में किसी भी तरह की खरीद के सप्लाई ऑर्डर पर पुलिस प्रमुख के हस्ताक्षर होते हैं। डीजीपी के ऑर्डर के बिना किसी भी तरह की सप्लाई नहीं होती है। विजिलेंस के लिए यह जांच का विषय है कि परचेज कमेटी के सप्लाई कैंसल करने की सिफारिश करने के बावजूद क्यों बूट खरीदे गए।

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