आसाराम ‘कोडवर्ड्स’ से करते थे लड़कियों का शिकार!

आसाराम ‘कोडवर्ड्स’ से करते थे लड़कियों का शिकार!

जयपुर: यौण शोषण के आरोप में फंसे कथावाचक आसाराम की मुश्किलें और बढऩे वाली हैं क्योंकि आसाराम के कोडवर्ड्स का खुलासा हुआ है। कोडवर्ड्स और उसका मतलब सिर्फ उनके सेवादार ही समझ सकते थे, किसी बाहरी व्यक्ति के लिए इन्हें समझ पाना संभव नहीं था।

पुलिस जांच में इस बात का खुलासा हुआ है कि ‘400 लगाओ’ का मतलब आसाराम से मोबाइल पर बात करना था। सब लोग यही सोचते थे कि उनके पास मोबाइल नहीं है लेकिन हकीकत कुछ और ही है। आसाराम का मोबाइल उनके रसोइए के पास होता था, हालांकि आसाराम के अलावा कोई भी व्यक्ति उस फोन पर आने वाली कॉल को सुन नहीं सकता था। आसाराम का रसोइया फोन रसीव करके आसाराम के कान पर लगा देता था। दरअसल आसाराम के मोबाइल के आखिरी अंक ‘400’ हैं इसीलिए उन्होंने अपना कोडवर्ड ‘400 लगाओ’ रखा था।

आसाराम का दूसरा कोडवर्ड था ‘समर्पण’। जब आसाराम को कोई लड़की अच्छी लगती थी तो वह सेवकों को ‘समर्पण’ का आदेश देते थे जिसका मतलब था लड़की को आसाराम से मिलने के लिए अकेले भेजो।

पीड़िता ने भी पुलिस और मजिस्ट्रेट को दिए बयान में कहा है कि उसके बीमार होने के तत्काल बाद छिंदवाड़ा आश्रम के निदेशक शरतचंद ने उसे अपने ऑफिस में बुलाया और साध्वी बनने की सलाह दे खुद को आसाराम को समर्पित करने के लिए कहा।

आसाराम का तीसरा कोडवर्ड था- ‘नया नाम’। आसाराम उनके आश्रम आने वाली लड़की को हमेशा नया नाम देते थे। उन्होंने पीड़िता को भी ‘जट्टी’ नाम दे रखा था। आसाराम की सेवादार ‘शिल्पी’ का भी असली नाम संचिता गुप्ता है।

आसाराम का चौथा कोडवर्ड था- ‘टॉर्च की रोशनी’। आसाराम ध्यान की कुटिया में अकेले ही रहा करते थे। जब भी किसी को वह ध्यान की कुटिया में बुलाना चाहते थे तो वह आवाज लगाने की बजाए टार्च मारकर उसे बुलाते थे।

आसाराम के बेटे नारायण साईं के निजी सचिव रहे महेंद्र चावला ने भी आसाराम पर सनसनीखेज आरोप लगाते हुए एक न्यूज चेनल से बातचीत में खुलासा किया था कि आसाराम लड़कियों के चयन के लिए भी एक खास तरीका अपनाता था। चावला ने कहा कि आसाराम टार्च की रोशनी से डिपर मारकर या फल फेंक कर लड़की को सेलेक्ट करता था।

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