बेघर हुए; जमीन भी गई, नहीं मिली नौकरी

रामपुर बुशहर। लोक कल्याण और क्षेत्र के विकास के बड़े-बड़े दावे करने वाला एसजेवीएनएल का रामपुर प्रोजेक्ट अभी तक एक भी प्रभावित परिवार को रोजगार नहीं दे पाया है। जिस परियोजना के लिए लोगों ने अपने घर तक दांव पर लगा दिए, आज उसी परियोजना में प्रभावितों की सुध लेने वाला कोई नहीं। प्रभावित परिवार रोजगार के लिए दर-दर की ठोकरें खाने के लिए मजबूर हैं। जबकि, परियोजना अंतिम चरण में है। अब परियोजना प्रबंधन प्रभावितों को रोजगार मांगने पर कायदा कानून की बातें करता है। जबकि, एमओयू में साफ कहा गया था कि सबसे पहले प्रभावितों को नौकरी दी जाएगी।
परियोजना निर्माण के दौरान 17 परिवारों का जमीन सहित घर का भी अधिग्रहण कर लिया गया था। जबकि, इसके अलावा 141 परिवार भी परियोजना से प्रभावित हैं। एमओयू में कहा गया था कि जिसकी जमीन और घर गए हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर स्थायी रोजगार दिया जाएगा लेकिन अब ऐसा नहीं हो पाया है। प्रभावितों में केवल राम, पन्ना लाल, रघुवीर सिंह, बिजू राम, कपूर चंद, गोविंद राम, टिकम राम, चामकू देवी सहित करीब 16 परिवारों के जमीन और घर परियोजना की भेंट चढ़ गए थे। इन लोगों का कहना है कि उन्हें प्रोजेक्ट में अभी तक स्थायी रोजगार नहीं मिल पाया है। अब तो हालत ऐसी हो गई है कि दो वक्त की रोटी के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। अगर प्रबंधन से बात करने जाते हैं तो वहां कभी भर्ती नियम तो अभी पोस्ट न होने की बात कही जा रही है। उच्च अधिकारी मिलने में भी आनाकानी करते हैं। इधर, इसके बारे में रामपुर प्रोजेक्ट के डीजीएम पीएंडए एफ भडै़क ने भी माना कि अभी तक एक को भी प्रोजेक्ट में स्थायी रोजगार नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा कि रिक्त पद होने पर नियम अनुसार भर्ती की जाएगी। हालांकि, लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मुहैया करवाया जा रहा है।

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