जेडी हेल्थ ने संभाली एपीएचसी की कमान

हल्द्वानी। जब कोई डाक्टर नहीं मिला तो जेडी हेल्थ को अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (एपीएचसी) की कमान संभालनी पड़ी। जबकि यह उनकी आराम करने की उम्र थी। कमान संभालते समय सोचा था कि जल्द कोई नया डाक्टर आएगा तो रिटायर्ड होने का मजा लेंगे। लेकिन दो साल हो गए पांडेनवाड़ में नया डाक्टर नहीं आया और डा. यशोधर चंद आज भी यहां मरीजों को दवा लिख रहे हैं। डा. चंद अकेले ऐसे रिटायर्ड मेडिकल अफसर नहीं हैं, जो आराम करने की उम्र में मरीजों के काम आ रहे हैं। इस तरह के अफसरों की वजह से कुमाऊं में ही करीब 25 अस्पताल अनाथ होने से बचे हैं।
उत्तराखंड में डाक्टरों की कमी है, यह बात पुरानी हो गई। अब जिनके भरोसे अस्पताल हैं, वह खबर हैं। पिछले दिनों में हमने आपको जोश्यूड़ा में एक सफाई कर्मी के भरोसे चल रहे अस्पताल की कहानी बताई थी। आज हम आपको स्वास्थ्य महकमे के शीर्ष अधिकारी रहे डाक्टर के भरोसे चल रहे अस्पताल की बात बता रहे हैं। डा. यशोधर चंद ने 1972 में कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कालेज से एमबीबीएस किया था। पहाड़ों से ही उन्होंने सेवा की शुरुआत की। बागेश्वर में सीएमओ रहे और भवाली सेनेटोरियम में सीएमएस भी रहे। 2006 में डा. चंद संयुक्त निदेशक स्वास्थ्य के पद से रिटायर हो गए।
चाहते तो अपना क्लीनिक खोल सकते थे। बेटा भी मेडिकल लाइन में है लेकिन ऐसा नहीं किया। क्योंकि डा. चंद मानते हैं कि जो सुकून मरीज को ठीक करने में है वह जेब भरने में नहीं। यही कारण है कि एक सड़क दुर्घटना में बुरी तरह घायल होने के बाद भी 67 साल के इस डाक्टर ने अस्पताल नहीं छोड़ा। रिटायर्ड होने के बाद भी पैसे का लालच छोड़ मरीजों की सेवा में लगे डा. यशोधर चंद अकेले मेडिकल ऑफिसर नहीं हैं। प्रदेश में करीब 70 रिटायर्ड जेडी हेल्थ हैं, जो विभिन्न अस्पतालों में मरीजों को देख रहे हैं। कुमाऊं में ऐसे करीब 25 मेडिकल अफसर हैं। इसमें सबसे अधिक नैनीताल में तैनात हैं। इनकी संख्या भले ही कम लग रही हो लेकिन इनके भरोसे हजारों जिंदगियां हैं।

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