
जोशीमठ (चमोली)। 16/17 जून की आपदा के तीन माह गुजर जाने के बाद भी द्वितीय रक्षा पंक्ति (भारत-चीन सीमा से लगे गांव) के सात गांवों के 1086 परिवार बेघर हैं। ये लोग विस्थापन, पुनर्वास, मूलभूत सुविधाओं के लिए सरकार का मुंह ताक रहे हैं। यहां वर्ष 1999 के भूकंप और उसी दौरान हुई अतिवृष्टि व भूस्खलन से 30 गांव विस्थापन के लिए चिह्नित हैं। हाल की आपदा ने ब्लॉक के सात गांव (भ्यूंडार, बदरीनाथ बामणी, पांडुकेश्वर, लामबगड़, बेनाकुली, खीरों और अरुड़ी-पटूड़ी) गांवों को तहस-नहस कर रख दिया है। लेकिन पिछले 14 वर्षों में तहसील के एक गांव को भी अभी तक विस्थापित नहीं किया गया है।
भ्यूंडार गांव का तो नामोनिशान ही मिट गया है। यहां के आपदा प्रभावित ग्रामीण तीन माह से जोशीमठ में होटलों में दिन गुजार रहे हैं। ग्रामीणों के खेत, दुकानें और होटल आपदा की भेंट चढ़ गए हैं। गांवों को जोड़ने वाली पुलिया, पैदल रास्ते तहस-नहस हो गए हैं। ऐसे में ग्रामीणों के समक्ष रोजी-रोटी का संकट गहरा गया है। आपदा प्रभावित ग्रामीण अपनी थाती-माटी को छोड़कर पलायन भी नहीं कर सकते हैं। जिससे वे क्षेत्र में ही खानाबदोश जिंदगी व्यतीत कर रहे हैं।
कराह रहा देश का अंतिम गांव माणा
जोशीमठ। देश के अंतिम गांव माणा में भी आपदा के तीन माह बाद स्थिति सामान्य नहीं हो पाई है। यहां वर्तमान में 200 परिवार निवास कर रहे हैं। लेकिन पिछले एक माह से माणा गांव में रसद का संकट बना है। ग्रामीण हनुमान चट्टी तक वाहन से और यहां से पांडुकेश्वर तक मीलों दूरी पैदल चलकर रसद की आपूर्ति कर रहे हैं। माणा गांव के पूर्व ग्राम प्रधान पीतांबर सिंह मोल्फा का कहना है कि क्षेत्र में रसोई गैस नहीं है। इससे ग्रामीण लकड़ी इकट्ठा कर जैसे-तैसे खाना पकाने के लिए मजबूर हैं। ग्रामीणों की आलू, राजमा, चौलाई की फसल पककर तैयार हो गई है। बदरीनाथ हाईवे के ध्वस्त पड़ा होने से इसके विपणन की व्यवस्था नहीं है। इससे ग्रामीणों के सम्मुख संकट पैदा हो गया है।
सेना ने सीमा क्षेत्र में रसद, आवश्यक वस्तुएं पहुंचाने को मांगा चापर
जोशीमठ। आईटीबीपी ने सीमा क्षेत्र में डटे सैनिकों को रसद व आवश्यक वस्तुएं पहुंचाने के लिए सरकार से एक चापर की मांग की है। आठवीं वाहिनी आईटीबीपी गौचर के कमांडेंट गंभीर सिंह चौहान ने बताया कि आपदा के तीन माह बाद भी बदरीनाथ हाईवे ध्वस्त पड़ा होने से सीमा पर डटे आईटीबीपी और सेना के जवानों की रसद, आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी चरमरा गई है। जवानों को जोशीमठ से माणा, सीमा क्षेत्र में आने के लिए मीलों दूरी पैदल नापनी पड़ रही है। रसद, ईंधन खच्चरों व पोर्टरों से सीमा क्षेत्र में पहुंचाया जा रहा है। लेकिन अक्तूबर माह से सीमा क्षेत्र में बर्फबारी, ठंड शुरू हो जाती है। इससे रसद व आवश्यक वस्तुओं का भंडारण जरूरी है।
हाल की आपदा से बेघर हुए गांव
गांव परिवार
अरुड़ी-पटूड़ी 207
पांडुकेश्वर (गोविंदघाट, पिनोला व घांघरिया) 364
पुलना-भ्यूंडार 99
ओथरमा चट्टी व बेनाकुली 93
जोशीमठ। उपजिलाधिकारी जोशीमठ एपी बाजपेयी ने बताया कि अभी तक जोशीमठ तहसील के अंतर्गत आपदा प्रभावित क्षेत्रों में प्रभावितों को सात करोड़ बावन लाख सत्रह हजार इकतालीस रुपये वितरित कर दिए हैं। लेकिन अभी भी आपदा प्रभावित क्षेत्रों की तस्वीर देखें तो स्थिति जस की तस बनी है।
कोट
आपदा प्रभावित चिह्नित गांवों के विस्थापन की रिपोर्ट शासन को भेजी है। हाल की आपदा में भी सात गांव विस्थापन की श्रेणी में आए हैं। इन गांवों के लिए भूमि चयन किया जा रहा है। ग्रामीणों के साथ बैठकर भूमि तलाशी गई। शीघ्र ही प्राथमिकता वाले गांवों को विस्थापित कर दिया जाएगा। फिलहाल प्रभावितों को राहत सामग्री वितरित की जा रही है। यदि माणा गांव में राहत सामग्री नहीं पहुंच रही है तो वहां शीघ्र राहत पहुंचाई जाएगी। बदरीनाथ हाईवे का निर्माण कार्य गतिमान है। शीघ्र ही हाईवे चालू हालत में आ जाएगा। – एसए मुरुगेशन, डीएम, चमोली
