
चंपावत। आज रविवार को चंपावत जिले के गठन को 16 वर्ष पूरे हो गए हैं। 1815 से लेकर 15 अगस्त 1947 तक अंग्रेजी शासनकाल के दौरान और उसके बाद आजाद भारत में 24 फरवरी 1960 तक अल्मोड़ा जिले का हिस्सा रहा चंपावत 15 सितंबर 1997 को अलग जिले के रूप में अस्तित्व में आने के बाद कोई खास उपलब्धि तो अपने खाते में नहीं डाला पाया है। लेकिन जिला गठन के इन 16 वर्षों की अवधि में 16 जिलाधिकारी जरूर यहां पर काम कर चुके हैं।
चंपावत जिले गठन के समय लोगों के मन में जो उत्साह तथा उम्मीदें थी वह डेढ़ दशक का लंबा अर्सा बीतने के बाद एक एक कर धूमिल होती जा रही हैं। लोगों को अपना ज्ञापन तथा प्रार्थनापत्र देने के लिए नजदीक में जिलाधिकारी तथा अन्य अधिकारी तो जरूर मिले लेकिन समस्याओं के समाधान की रफ्तार बेहद धीमी है। जिले के गांवों तक विकास की जो लहर पहुंचने की उम्मीद लोगों ने लगाई थी वह तेजी से बदलने वाले जिलाधिकारियों की वजह से परवान नहीं चढ़ पाई। जिले के विकास के लिए अच्छी सोच रखने वाले कई जिलाधिकारी यहां पर तैनात जरूर हुए लेकिन जब तक वह अपनी सोच का फायदा लोगों को देने की सोचते तब तक उनका स्थानांतरण कर दिया जाता है।
जिला गठन के बाद पिछले डेढ़ दशक में पलायन पर ब्रेक लगने के बजाए और तेजी आई है। आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में अकेले पर्वतीय हिस्से से 500 परिवारों का पलायन हुआ है। जिले के प्रथम जिलाधिकारी नवीन चंद्र शर्मा ने चंपावत नगर में मास्टर प्लान लागू करने का जो खाका तैयार किया था, उसे उनके बाद आने वाले जिलाधिकारियों ने कतई प्राथमिकता में नहीं रखा।
