
चौखुटिया। जमाना इनसे सीखे तो तस्वीर बदल जाएगी। दृष्टिहीन अवतार नेगी अपनी गरीब और बूढ़ी मां के लिए किसी देव अवतार से कम नही हैं। सहानुभूति जताने वाले लोगों की मदद से वह न सिर्फ खुद का पेट भरता है बल्कि मां का पालन-पोषण भी कर रहा है।
आदि बद्री से लेकर चौखुटिया तक के करीब 70 किलोमीटर क्षेत्र में दृष्टिहीन अवतार नेगी (33) एक जाना पहिचाना नाम है। उसकी परिस्थितियों से वाकिफ हर कोई उसकी मदद करता है। गैरसैंण के घन्डयाल निवासी दृष्टिहीन अवतार की चार साल की उम्र में टाइफाइट और दीमागी बुखार से दोनों आंखें चली गईं। 17 साल पहले पिता खीमसिंह नेगी की मृत्यु हो गई। छोटा भाई पैरों से विकलांग है, जबकि दो भाई जैसे तैसे अपना गुजारा करते हैं।
अवतार बताता है कि वह भाइयों में सबसे बड़ा है। घर की माली हालत ठीक न होने से मदद के बगैर पेट भर पाना मुश्किल था। घर से निकलने के बाद उसकी मदद करने वालों की संख्या बढ़ती गई। पीठ में बैग, हाथ में छतरी और गुल्लक लिए अवतार इसी गुल्लक में जमा धनराशि को महीने में एक बार घर जाकर बूढ़ी मां सीतादेवी को दे आता है। बताता है कि हर माह डेढ़ हजार से तीन हजार तक जमा हो जाता है।
बताता है कि गैरसैंण बाजार में चार साल से दयाराम सती जी के घर पर ही उसका ठिकाना है रहने खाने की व्यवस्था हो जाती है। मठपाल जी और अन्य लोग भी मदद करते हैं। मैहलचौरी में सुरेश बिष्ट, बीरेंद्र, प्रेम संगेला मदद करते हैं। पंडुवाखाल में शिवदा, राजू भाई तो चौखुटिया में आनंद मिष्ठान और सूरी होटल वाले खाना खिलाते हैं। इन क्षेत्रों में अन्य तमाम लोग भी मदद करते हैं। दृष्टिहीन होने के बावजूद मां का पालन-पोषण करने वाले इस युवक से उन लोगों को प्रेरणा लेनी चाहिए, जो संपन्न होने के बावजूद माता-पिता को बोझ समझने की भूल करते हैं।
