ये कैसी राजधानी, एक साल से उड़ानें नहीं!

शिमला। शिमला बेशक देश-विदेश में पर्यटन स्थल के रूप में मशहूर हो, लेकिन यह प्रदेश की ऐसी राजधानी है, जहां पिछले एक साल से कोई हवाई उड़ान नहीं हुई। सितंबर 2012 में यहां हवाई सेवाएं बंद हुई थी। लेकिन अब रनवे के एक हिस्से में भूमि कटाव के कारण यह एयरपोर्ट उड़ानों लायक नहीं है।
पहाड़ी की चोटी को समतल कर बनाए गए इस एयरपोर्ट की हवाई पट्टी करीब 1230 मीटर लंबी है। इसमें से एक सिरे पर 400 से 500 मीटर लंबाई वाला भाग भू-स्खलन की चपेट में है। इसे रोकने के लिए राज्य सरकार ने एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया से मसला उठाया है। लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। जनवरी में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने इस बारे में केंद्रीय मंत्री को पत्र भेजा था। फिर सांसद प्रतिभा सिंह ने केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री अजित सिंह से मिलकर इसके लिए धन का प्रावधान करने को कहा। अब उद्योग मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने राज्यों के पर्यटन मंत्रियों के सम्मेलन में यह मसला उठाया था।
पर्यटन निदेशक सुभाषीश पांडा कहते हैं कि जुब्बड़हट्टी में पहले भी छोटा विमान ही उतरता था। अब छोटे एयरपोर्ट के लिए निजी कंपनियां तैयार नहीं होती। 32 सीटर से कम विमान को इकोनोमिकल भी नहीं माना जाता। नई दिल्ली में हाल ही में हुई बैठक में राज्य की ओर से यह मसला उठाया गया था। हिमाचल ने अप्रैल, 2013 से एयर फ्यूल पर वैट को 5 से घटाकर मात्र 1 प्रतिशत कर दिया है। लेकिन जुब्बड़हट्टी में पहले एयरपोर्ट को ठीक करना होगा। कुल्लू के भुंतर और कांगड़ा के गगल एयरपोर्ट पर वर्तमान में एयर इंडिया और स्पाइस जेट की उड़ानें चल रही हैं।

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