अब ईरानी एप्पल से भिडे़गा हिमाचली सेब

शिमला। अब हिमाचल का सेब ईरानी एप्पल से भिड़ेगा। इपोर्टरों ने एक लाख मीट्रिक टन से ज्यादा ईरानी सेब के ऑर्डर दे दिए हैं। हिमाचली सेब से गुणवत्ता में बेहतर होने के कारण इसकी मांग इस बार ज्यादा है। इससे हिमाचल में सीजन के अंतिम चरण में सेब के दाम फिर से गिर सकते हैं। ईरानी सेब की आपूर्ति अक्तूबर के बीच में ही शुरू हो जाएगी।
हिमाचल में सेब सीजन इन दिनों उफान पर है। सेब की लगभग ढाई करोड़ पेटियां मार्केट में भेजी जा चुकी हैं। अभी तकरीबन डेढ़ करोड़ पेटियां पीछे हैं। राज्य में सेब सीजन अक्तूबर अंत तक चलेगा। किन्नौर जिला के खूब ऊंचे क्षेत्रों का सेब तो नवंबर में भी जाएगा। इससे पहले ही 15 अक्तूबर तक ईरान का सेब देश की मंडियों में धमक आएगा। यह सेब अफगानिस्तान के रास्ते बुक किया जा रहा है। साउथ एशियन फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (साफ्टा) के अनुसार अफगानिस्तान के साथ भारत का करमुक्त व्यापार है। ईरान के साथ नहीं। ऐसे में ईरान का अधिकतर सेब पहले अफगानिस्तान और उसके बाद वहां का मार्का लगाकर भारत भेजा जाता रहा है। आजादपुर मंडी नई दिल्ली के सूत्रों की मानें तो सेब को आयात करने और इसका ऑर्डर देने से पहले भारत के इंपोर्टर खुद ईरान और अफगानिस्तान के दौरे पर जा चुके हैं। शुरुआती दौर में नई दिल्ली और मुंबई के इंपोर्टरों ने लगभग एक लाख मीट्रिक टन यानी 25 लाख पेटियों के ऑर्डर भी कर दिए हैं। ईरान का सेब हिमाचल के किन्नौर के सेब की तरह गुणवत्तापूर्ण होता है। भले ही हिमाचल में इस बार सेब की फसल अच्छी है, मगर सेब की गुणवत्ता वैसी नहीं है, जैसी कि ईरान की रहती है। शिमला मर्चेंट एसोसिएशन आजादपुर मंडी नई दिल्ली के आढ़ती भगवान दास ने माना कि आगामी दिनों में अकेले नई दिल्ली और मुंबई से काफी ईरानी सेब का आयात होने की सूचना मिल रही है। ऑल इंडिया इंपोर्ट्स एसोसिएशन से जुडे़ मुंबई के व्यवसायी अनिल त्रिवेदी ने बताया कि ईरानी सेब अक्तूबर अंत तक आएगा। हालांकि, इस बार फसल वहां बहुत अच्छी नहीं है। इसके बावजूद यह सेब गुणवत्ता में हिमाचली एप्पल से अच्छा होने पर इसकी अलग से मांग रहती है। हाल ही में सेब का आयात करने वाले कुछ व्यवसायियों ने इसके लिए ईरान का विजिट भी किया है।
इनसेट
भारत सरकार से उठा सकते हैं मामला
‘अगर ईरान का सेब अफगानिस्तान के रास्ते भारत आयात किया जा रहा है, तो इस मामले को भारत सरकार के समक्ष उठाया जा सकता है। गुणवत्ता में तो हिमाचल का सेब कम छिड़काव की वजह से विदेशी सेब से बेहतर माना जाना चाहिए। हिमाचल के सेब उत्पादकों से भी अनुरोध है कि वे ईरान के सेब से भिड़ने को गुणवत्तायुक्त सेब का ही विक्रय करें।’
डा. सुभाष मंगलेट, चेयरमैन, हिमाचल प्रदेश कृषि उत्पाद विपणन बोर्ड।
सुरेश शांडिल्य

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