
औरंगाबाद (बिहार): दिल्ली की एक अदालत ने पिछले साल 16 दिसंबर को चलती बस में 23 वर्षीया एक छात्रा के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म के मामले में शुक्रवार को सुनाए गए फांसी की सजा पाने वाले चार आरोपियों में से एक बिहार के औरंगाबाद जिले के रहने वाले अक्षय ठाकुर के गांव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है। अक्षय के परिवार के साथ-साथ पूरा गांव गमजदा है।
औरंगाबाद जिले के टंडवा थाना के करमालहंग गांव के रहने वाले अक्षय के गांव में दो बजे से ही लोग उस फैसले के इंतजार में थे। गांव में वैसे तो टेलीविजन काफी कम के घर में है परंतु जहां भी टेलीविजन है वहां लोग फैसला सुनने को बेताब थे।
न्यायालय द्वारा फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद ही पूरा गांव गम में डूब गया। गांव में मीडिया वालों के आने पर भी कुछ समय के लिए रोक लगा दी गई थी। फैसला सुनने के बाद अक्षय की मां मालती देवी और उसकी पत्नी पुनीता देवी बेहोश हो गई। जब ग्रामीण महिलाओं द्वारा उन्हें होश में लाया गया तो दोनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
मालती देवी को अब भगवान के सहारे की ही आस है। वह बार-बार यही कह रही है कि ‘उनका लाल ऐसा घिनौना कार्य नहीं कर सकता है, उसे जरूर इंसाफ मिलेगा।’
