
नई दिल्लीः सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के एक प्रावधान को बाधक के रूप में व्याख्यायित किया। वरिष्ठ राजनयिकों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों की जांच शुरू करने के लिए सीबीआई को केंद्र सरकार की मंजूरी लेनी पड़ती है।
सर्वोच्च न्यायालय ने इसी प्रावधान पर टिप्पणी की। बावजूद इसके केंद्र सरकार इस कानून को जारी रखने पर जोर दे रहा है। महान्यायवादी जी. ई. वाहनवती ने सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति आर. एम. लोढ़ा, न्यायमूर्ति मदन बी. लोकूर और न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ की पीठ के समक्ष कहा, ‘‘न्यायालय जब कहता है कि जांच कानून के मुताबिक हो तो उस कानून में धारा 6ए (दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम) भी मौजूद होती है।’’
सर्वोच्च न्यायालय में इस प्रश्न पर सुनवाई हो रही थी कि न्यायालय की निगरानी में या न्यायालय द्वारा निर्देशित मामलों में सीबीआई को जांच शुरू करने के लिए सरकार की अनुमति लेनी पड़ेगी या नहीं। न्यायमूर्ति लोकूर ने वाहनवती से सवालिया लहजे में कहा, ‘‘क्या तब विवाद की स्थिति नहीं खड़ी हो जाएगी, जब सरकार किसी वरिष्ठ राजनयिक के खिलाफ सीबीआई के जांच के निवेदन को ठुकरा दे और न्यायालय जांच के लिए कहे।’’
दिन भर चली सुनवाई के बाद न्यायालय ने सीबीआई की दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से उचित प्रशासनिक आदेश पारित करने के लिए सरकार को सीबीआई पर अपनी प्रस्तुति देने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है।
