
गिरता रुपया लाएगा गत्ता कीमतों में उछाल
बद्दी (सोलन)। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरते रुपये और डीजल की कीमतों में उछाल का असर हिमाचल में गत्ता उद्योग पर पड़ेगा। गत्ता उद्योग संघ की बीबीएन इकाई की बैठक में गत्ते के रेट 15 फीसदी बढ़ाने का प्रस्ताव पारित किया गया है। संचालकों का कहना है कि इन सब प्रभावों के चलते गत्ते में इस्तेमाल होने वाले पेपर और अन्य सामग्री की कीमत 4 रुपये प्रतिकिलो तक बढ़ गई हैं। उद्योगपतियों का दावा है कि किसी भी उत्पाद में 2 से 4 फीसदी पैकेजिंग लागत होती है। अगर गत्ते की कीमत 15 फीसदी तक बढ़ती हैं तो उत्पाद एक फीसदी तक महंगा हो सकता है। वर्तमान में बीबीएन में 450 तरह के गत्ते का उत्पादन हो रहा है। विभिन्न उत्पादों की पैकेजिंग के लिए यह गत्ता प्रयोग में लाया जाता है।
बद्दी में बैठक की अध्यक्षता करते हुए बीबीएन इकाई के अध्यक्ष निर्मल सिंगला ने कहा कि पिछले दो माह से डॉलर का रेट बढ़ने से पेपर मिलों के रेट में चार रुपये प्रति किलो उछाल आया है। डीजल के रेट छह माह के दौरान 40 रुपये से 51 रुपये हो गए हैं। इससे भाड़े में 15 से 20 फीसदी की बढ़ोतरी हो गई है। गत्ते में लगने वाले सभी प्रकार कच्चे माल में 20 फीसदी बढ़ोतरी हो गई है। कीमतों में 15 फीसदी तक वृद्धि नहीं हुई तो उद्योग बंद होने की कगार पर आ जाएंगे। बैठक में महामंत्री अशोक राणा, पूर्व अध्यक्ष सुरेंद्र जैन, उपाध्यक्ष हेमराज चौधरी, बलराम अग्रवाल, विकास सिंगला, बलदेव गोयल, सतीश सैणी, राजीव धवन, महेश भंसाली, मनोज कुमार, तेजेंद्र बंसल, सुशील सिंगला मौजूद रहे।
हर माह 25 हजार टन गत्ते का उत्पादन
बीबीएन में सेब को छोड़कर अन्य उत्पादों के पैकेजिंग के लिए गत्ता प्रयोग में लाया जाता है। स्थानीय मार्केट की डिमांड लोकल गत्ते से ही पूरी होती है। हर माह 25 हजार टन विभिन्न गत्ता बीबीएन में तैयार होता है। करीबन चार करोड़ मासिक सरकार को विभिन्न टैक्स की दरों के तहत राजस्व प्राप्त होता है।
