
मंडी। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत अब सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले पहली से आठवीं कक्षा के बच्चों को मुफ्त शिक्षा मिलेगी। मासिक फीस नहीं ली जाएगी। इस बारे में शिक्षा विभाग की ओर से सभी स्कूलों के मुखिया को बच्चों से फीस न लेने के दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। जिला मंडी में 2417 प्राइमरी और अपर प्राइमरी स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा तक हजारों बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे, इस उद्देश्य से शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 को लागू किया गया। आरटीई के तहत पहली से आठवीं कक्षा तक के सभी बच्चों को निशुल्क शिक्षा का प्रावधान किया गया। इस शैक्षणिक सत्र से शिक्षा विभाग ने सभी प्राइमरी और अपर प्राइमरी स्कूलों के मुखिया को बच्चों से मासिक फीस न लेने के निर्देश जारी किए हैं।
प्रदेश में इस साल अप्रैल माह से शिक्षा का अधिकार अधिनियम को इंप्लीमेंट किया गया। आरटीई को बेहतर ढंग से क्रियान्वित करने के लिए ब्लॉक स्तर पर सरकारी स्कूलों में मौजूद आधारभूत ढांचे और अन्य सुविधाओं का सर्वे करवाया गया, ताकि पाठशालाओं को आरटीई के मानकों के अनुरूप तैयार किया जा सके। 15 जुलाई को सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के तहत सभी सरकारी व सरकार से वित्त पोषित स्कूलों को आदेश जारी किए गए कि पहली से आठवीं कक्षा में पढ़ने वाले किसी भी बच्चे से फीस न ली जाए।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम के जिला समन्वयक चंद्रशेखर ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि सरकारी और सरकार से वित्तीय सहायता प्राप्त स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा में पढ़ने वाले बच्चों से फीस नहीं ली जाएगी। इस बारे में शिक्षा विभाग की ओर से प्रदेश भर के सभी स्कूलों के मुखिया को फीस न लेने के निर्देश दिए गए हैं।
