
धर्मशाला। निर्वासित तिब्बत सरकार ने कम्युनिस्ट चीन से वार्ता करने के लिए अपनी रणनीति तय कर ली है। शनिवार को निर्वासित सरकार की प्रशासनिक टास्क फोर्स की तीन दिवसीय बैठक नए मसौदे के साथ संपन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता करने वाले तिब्बत के प्रधानमंत्री डा. लोबसंग सांग्ये ने कहा कि अगले वर्ष की शुरुआत में ही चीन से वार्ता को लेकर दबाव बनाया जाएगा। इसके लिए तिब्बत ने अपनी रणनीति बना ली है।
हालांकि उन्होंने अपने एजेंडे का खुलासा नहीं किया है। लेकिन सूत्र बताते हैं कि बैठक में मध्य मार्ग पर ही मुख्यत: चरचा हुई है। वहीं तिब्बत में आत्मदाह की घटनाओं पर भी निर्वासित सरकार के प्रतिनिधियों ने गहन मंथन कर इस तरह की घटनाओं के प्रति चिंता जाहिर की। वहीं, सर्वोच्च धर्मगुरु दलाईलामा के विशेष दूतों को वार्ता में शामिल करने के फैसले पर इस बैठक में कोई निर्णय नहीं हो सका है। सरकार के निर्वाचन से पूर्व दलाईलामा के विशेष दूत ही चीन से वार्ता करते आए हैं। तिब्बतियन पॉलिसी इंस्टीट्यूट के निदेशक एवं टास्क फोर्स के प्रवक्ता थुब्तेन सांफेल ने बताया कि प्रतिनिधियों ने एक स्पष्ट नीति तय कर ली है। उन्होंने बताया कि ये भी संकेत मिले हैं कि चीन ने तिब्बत के कुछ हिस्सों में भिक्षुओं को धर्मगुरु दलाईलामा के चित्र लगाने की अनुमति दी है। बैठक में छह नए सदस्य भी शामिल थे। इनमें पूर्व प्रधानमंत्री प्रो. सामदोंग रिंपोंछे, लोबसंग नेंडक, टशी फुंचोक, कुंगा टशी, फग्पा छेरिंग और सोनम छेरिंग मौजूद रहे।
