विचित्र वाटिका के आवासों को फ्री-होल्ड करने की तैयारी

हरिद्वार। नगर निगम अपनी आवासीय कालोनी विचित्र वाटिका के आवासों को कवर्ड एरिया की खाली भूमि सहित फ्री-होल्ड करने की तैयारी कर रहा है। 30 आवासों के साथ बाजार रेट की करोड़ों की भूमि को लाखों में फ्री-होल्ड करने की योजना है। शुक्रवार को होने जा रही कार्यकारिणी की बैठक में इसके प्रस्ताव पर मुहर लगने की संभावना है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने एक नवंबर 1958 को शासनादेश जारी कर म्यूनिस्पिल बोर्ड हरिद्वार को अल्प आय वर्ग योजना में विचित्र वाटिका और देवपुरा में 30 आवास बनाने के लिए ऋण दिया था। इनमें से 25 फीसदी (आठ आवास) आवास नगर पालिका के उन कर्मचारियों को अलाट होने थे जिनकी वार्षिक आय उस समय छह हजार रुपये थी। जबकि 75 फीसदी आवास (22 आवास) आम नागरिकों को अलाट किए जाने थे। लेकिन, उस समय पालिका अधिकारियों ने अपनी मर्जी से 85 फीसदी आवास 53 रुपये मासिक किराए पर अपने कर्मचारियों को दे दिए। अब 55 साल बाद इन आवासों को फ्री होल्ड करने की तैयारी चल रही है। इन आवासों पर काबिज रिटायर कर्मियों और उनके रिश्तेदारों को फ्री-होल्ड करने का प्रस्ताव पारित कर शासन को भेजने के लिए शुक्रवार की बैठक में मुहर लगाने की तैयारी है।
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लोकायुक्त की संस्तुति क्या कहती है
हरिद्वार। उत्तराखंड के लोकायुक्त न्यायमूर्ति एमएम घिल्डियाल ने इस प्रकरण में 12 जुलाई को प्रमुख सचिव/सचिव, शहरी विकास को शासनादेश में उल्लिखित शर्तों के अनुरूप निस्तारण के लिए मंडलायुक्त को आदेश पारित करने की संस्तुति की थी। लोकायुक्त न्यायालय में मामला ले जाने वाले समाज सेवी रमेशचंद्र शर्मा ने बताया कि आयुक्त को वैध अध्यासियों का चयन कर, वर्तमान सर्किल रेट के आधार पर 30 आवासों का निस्तारण करना है। साथ ही 1958 के शासनादेश के अनुरूप प्राप्त धनराशि को राजकीय कोष में जमा भी कराना है। नगर निगम बोर्ड यदि इसके विपरीत मनमानी कर कोई निर्णय लेता है तो उसका विरोध किया जाएगा।
कोट
नगर निगम कार्यकारिणी की बैठक शुक्रवार को होेगी। जिसमेें विचित्र वाटिका के आवासों को फ्र्री-होल्ड करने सहित सभी मुद्दोें पर विचार विमर्श किया जाएगा। लेकिन अंतिम निर्णय बोर्ड में ही लेगा। दुकानों का किराया प्रकरण, उषा ब्रेको कंपनी के रोपवे का मामला और भगत सिंह चौक से ज्वालापुर की ओर सेक्टर टू बैरियर तक चित्रा टाकीज क्षेत्र के उजड़े दुकानों को विकल्प देने के प्रस्ताव पर विचार होगा। लोक निर्माण विभाग ने इसके लिए एनओसी भी दे दी है।
मनोज गर्ग, नगर प्रमुख।
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80 करोड़ रुपये की भूमि की पैरवी नहीं

हरिद्वार। नगर निगम एक-एक कर करोड़ों की संपत्तियों को गंवाता जा रहा है। निगम की पाश कालोनी न्यू हरिद्वार स्थित स्कूल और क्रीड़ा स्थल (पार्क) की लगभग 80 करोड़ की 10 बीघा भूमि की पैरोकारी ही नहीं कर रहा है। जबकि इस भूमि पर कई लोगों की नजरें हैं।
मध्य हरिद्वार स्थित न्यू हरिद्वार आवासीय कालोनी सबसे पहले विकसित एवं व्यवस्थित कालोनी है। सन 1962 में इस कालोनी को काटा गया था। उत्तर प्रदेश नगर नियोजक विभाग द्वारा स्वीकृत इस कालोनी का नक्शा पालिका के विनियमित प्राधिकारी द्वारा स्वीकृत किया था। बिल्डर द्वारा कालोनी में स्कूल, क्रीड़ा स्थल एवं पार्क के लिए करीब 10 बीघा भूमि सड़क के साथ पालिका परिषद के स्वामित्व में दी थी। लेकिन, नगरपालिका ने स्कूल व क्रीड़ा स्थल नहीं बनाया। भूमि खाली पड़ी रही।
नया हरिद्वार वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष रामबाबू बंसल व महामंत्री श्याम बाबू शर्मा ने बताया कि 17 जुलाई 1995 को कुछ लोगों ने तीन बीघा भूमि की रजिस्ट्री करवा दी। इसके विरुद्ध कालोनी की ओर से सतीश कुमार बडगोती कालोेनी की स्कूल, क्रीड़ा व पार्क की भूमि बेचने के खिलाफ सिविल न्यायालय गए। बाद में नगरपालिका भी इसमें पार्टी बनी। सोसायटी पदाधिकारियों के मुताबिक नगर पालिका यह केस हार गई। बाद में कालोनीवासियों ने संस्था बनाई और 2001 से इस भूमि को बचाने में जुट गए। नया हरिद्वार वेलफेयर सोसाइटी के पदाधिकारियों का कहना है कि भूमि बचाने के लिए अब नैनीताल हाईकोर्ट की शरण ली गई है। लेकिन सोसाइटी के पदाधिकारियों के आग्रह के बाद भी अभी तक नगर निगम हाईकोर्ट में पक्षकार नहीं बना है। जबकि केस की सुनवाई 19 सितंबर को होनी है।
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भाटी ने उठाई थी भूमि बचाने की आवाज
नगरपालिका परिषद के तत्कालीन सभासद दुर्गाशंकर भाटी आवाज नहीं उठाते तो अब तक भूमाफिया ने इस भूमि को ठिकाने लगा दिया होता। भाटी ने 22 फरवरी 2000 को तत्कालीन सहारनपुर मंडल के आयुक्त को इस भूमि को खुर्द-बुर्द होने से बचाने के लिए पत्र लिखा था। डीएम और ईओ नगरपालिका को भी कापी दी गई थी। जिसे ईओ बोर्ड अध्यक्ष को भेजा था। जवाब में ईओ को लिखा गया कि अगर किसी के द्वारा अनाधिकृत कब्जा किया जा रहा है तो तुरंत कब्जा हटाकर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई जाए। अधिकारियों ने रिपोर्ट तो नहीं लिखवाई पर जो बोर्ड लगा था उसको हटा दिया था।
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हाईकोर्ट में पार्टी बनेगा निगम
-नगर प्रमुख मनोज गर्ग ने बताया कि न्यू हरिद्वार की भूमि बचाने के लिए नगर निगम हाईकोर्ट जाएगा। इसके लिए एमएनए को कह दिया है। किसी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उधर, एमएनए जीवन सिंह नागन्याल ने बताया कि भूमि संबंधी फाइल को तलब कर लिया है। निगम जल्द हाईकोर्ट में पार्टी बनने के लिए विधिक कार्रवाई करेगा। किसी के भी भूमि पर कब्जे करने के मंसूबे पूरे नहीं होने दिए जाएंगे।हरिद्वार। नगर निगम अपनी आवासीय कालोनी विचित्र वाटिका के आवासों को कवर्ड एरिया की खाली भूमि सहित फ्री-होल्ड करने की तैयारी कर रहा है। 30 आवासों के साथ बाजार रेट की करोड़ों की भूमि को लाखों में फ्री-होल्ड करने की योजना है। शुक्रवार को होने जा रही कार्यकारिणी की बैठक में इसके प्रस्ताव पर मुहर लगने की संभावना है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने एक नवंबर 1958 को शासनादेश जारी कर म्यूनिस्पिल बोर्ड हरिद्वार को अल्प आय वर्ग योजना में विचित्र वाटिका और देवपुरा में 30 आवास बनाने के लिए ऋण दिया था। इनमें से 25 फीसदी (आठ आवास) आवास नगर पालिका के उन कर्मचारियों को अलाट होने थे जिनकी वार्षिक आय उस समय छह हजार रुपये थी। जबकि 75 फीसदी आवास (22 आवास) आम नागरिकों को अलाट किए जाने थे। लेकिन, उस समय पालिका अधिकारियों ने अपनी मर्जी से 85 फीसदी आवास 53 रुपये मासिक किराए पर अपने कर्मचारियों को दे दिए। अब 55 साल बाद इन आवासों को फ्री होल्ड करने की तैयारी चल रही है। इन आवासों पर काबिज रिटायर कर्मियों और उनके रिश्तेदारों को फ्री-होल्ड करने का प्रस्ताव पारित कर शासन को भेजने के लिए शुक्रवार की बैठक में मुहर लगाने की तैयारी है।
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लोकायुक्त की संस्तुति क्या कहती है
हरिद्वार। उत्तराखंड के लोकायुक्त न्यायमूर्ति एमएम घिल्डियाल ने इस प्रकरण में 12 जुलाई को प्रमुख सचिव/सचिव, शहरी विकास को शासनादेश में उल्लिखित शर्तों के अनुरूप निस्तारण के लिए मंडलायुक्त को आदेश पारित करने की संस्तुति की थी। लोकायुक्त न्यायालय में मामला ले जाने वाले समाज सेवी रमेशचंद्र शर्मा ने बताया कि आयुक्त को वैध अध्यासियों का चयन कर, वर्तमान सर्किल रेट के आधार पर 30 आवासों का निस्तारण करना है। साथ ही 1958 के शासनादेश के अनुरूप प्राप्त धनराशि को राजकीय कोष में जमा भी कराना है। नगर निगम बोर्ड यदि इसके विपरीत मनमानी कर कोई निर्णय लेता है तो उसका विरोध किया जाएगा।
कोट
नगर निगम कार्यकारिणी की बैठक शुक्रवार को होेगी। जिसमेें विचित्र वाटिका के आवासों को फ्र्री-होल्ड करने सहित सभी मुद्दोें पर विचार विमर्श किया जाएगा। लेकिन अंतिम निर्णय बोर्ड में ही लेगा। दुकानों का किराया प्रकरण, उषा ब्रेको कंपनी के रोपवे का मामला और भगत सिंह चौक से ज्वालापुर की ओर सेक्टर टू बैरियर तक चित्रा टाकीज क्षेत्र के उजड़े दुकानों को विकल्प देने के प्रस्ताव पर विचार होगा। लोक निर्माण विभाग ने इसके लिए एनओसी भी दे दी है।
मनोज गर्ग, नगर प्रमुख।
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80 करोड़ रुपये की भूमि की पैरवी नहीं

हरिद्वार। नगर निगम एक-एक कर करोड़ों की संपत्तियों को गंवाता जा रहा है। निगम की पाश कालोनी न्यू हरिद्वार स्थित स्कूल और क्रीड़ा स्थल (पार्क) की लगभग 80 करोड़ की 10 बीघा भूमि की पैरोकारी ही नहीं कर रहा है। जबकि इस भूमि पर कई लोगों की नजरें हैं।
मध्य हरिद्वार स्थित न्यू हरिद्वार आवासीय कालोनी सबसे पहले विकसित एवं व्यवस्थित कालोनी है। सन 1962 में इस कालोनी को काटा गया था। उत्तर प्रदेश नगर नियोजक विभाग द्वारा स्वीकृत इस कालोनी का नक्शा पालिका के विनियमित प्राधिकारी द्वारा स्वीकृत किया था। बिल्डर द्वारा कालोनी में स्कूल, क्रीड़ा स्थल एवं पार्क के लिए करीब 10 बीघा भूमि सड़क के साथ पालिका परिषद के स्वामित्व में दी थी। लेकिन, नगरपालिका ने स्कूल व क्रीड़ा स्थल नहीं बनाया। भूमि खाली पड़ी रही।
नया हरिद्वार वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष रामबाबू बंसल व महामंत्री श्याम बाबू शर्मा ने बताया कि 17 जुलाई 1995 को कुछ लोगों ने तीन बीघा भूमि की रजिस्ट्री करवा दी। इसके विरुद्ध कालोनी की ओर से सतीश कुमार बडगोती कालोेनी की स्कूल, क्रीड़ा व पार्क की भूमि बेचने के खिलाफ सिविल न्यायालय गए। बाद में नगरपालिका भी इसमें पार्टी बनी। सोसायटी पदाधिकारियों के मुताबिक नगर पालिका यह केस हार गई। बाद में कालोनीवासियों ने संस्था बनाई और 2001 से इस भूमि को बचाने में जुट गए। नया हरिद्वार वेलफेयर सोसाइटी के पदाधिकारियों का कहना है कि भूमि बचाने के लिए अब नैनीताल हाईकोर्ट की शरण ली गई है। लेकिन सोसाइटी के पदाधिकारियों के आग्रह के बाद भी अभी तक नगर निगम हाईकोर्ट में पक्षकार नहीं बना है। जबकि केस की सुनवाई 19 सितंबर को होनी है।
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भाटी ने उठाई थी भूमि बचाने की आवाज
नगरपालिका परिषद के तत्कालीन सभासद दुर्गाशंकर भाटी आवाज नहीं उठाते तो अब तक भूमाफिया ने इस भूमि को ठिकाने लगा दिया होता। भाटी ने 22 फरवरी 2000 को तत्कालीन सहारनपुर मंडल के आयुक्त को इस भूमि को खुर्द-बुर्द होने से बचाने के लिए पत्र लिखा था। डीएम और ईओ नगरपालिका को भी कापी दी गई थी। जिसे ईओ बोर्ड अध्यक्ष को भेजा था। जवाब में ईओ को लिखा गया कि अगर किसी के द्वारा अनाधिकृत कब्जा किया जा रहा है तो तुरंत कब्जा हटाकर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई जाए। अधिकारियों ने रिपोर्ट तो नहीं लिखवाई पर जो बोर्ड लगा था उसको हटा दिया था।
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हाईकोर्ट में पार्टी बनेगा निगम
-नगर प्रमुख मनोज गर्ग ने बताया कि न्यू हरिद्वार की भूमि बचाने के लिए नगर निगम हाईकोर्ट जाएगा। इसके लिए एमएनए को कह दिया है। किसी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उधर, एमएनए जीवन सिंह नागन्याल ने बताया कि भूमि संबंधी फाइल को तलब कर लिया है। निगम जल्द हाईकोर्ट में पार्टी बनने के लिए विधिक कार्रवाई करेगा। किसी के भी भूमि पर कब्जे करने के मंसूबे पूरे नहीं होने दिए जाएंगे।हरिद्वार। नगर निगम अपनी आवासीय कालोनी विचित्र वाटिका के आवासों को कवर्ड एरिया की खाली भूमि सहित फ्री-होल्ड करने की तैयारी कर रहा है। 30 आवासों के साथ बाजार रेट की करोड़ों की भूमि को लाखों में फ्री-होल्ड करने की योजना है। शुक्रवार को होने जा रही कार्यकारिणी की बैठक में इसके प्रस्ताव पर मुहर लगने की संभावना है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने एक नवंबर 1958 को शासनादेश जारी कर म्यूनिस्पिल बोर्ड हरिद्वार को अल्प आय वर्ग योजना में विचित्र वाटिका और देवपुरा में 30 आवास बनाने के लिए ऋण दिया था। इनमें से 25 फीसदी (आठ आवास) आवास नगर पालिका के उन कर्मचारियों को अलाट होने थे जिनकी वार्षिक आय उस समय छह हजार रुपये थी। जबकि 75 फीसदी आवास (22 आवास) आम नागरिकों को अलाट किए जाने थे। लेकिन, उस समय पालिका अधिकारियों ने अपनी मर्जी से 85 फीसदी आवास 53 रुपये मासिक किराए पर अपने कर्मचारियों को दे दिए। अब 55 साल बाद इन आवासों को फ्री होल्ड करने की तैयारी चल रही है। इन आवासों पर काबिज रिटायर कर्मियों और उनके रिश्तेदारों को फ्री-होल्ड करने का प्रस्ताव पारित कर शासन को भेजने के लिए शुक्रवार की बैठक में मुहर लगाने की तैयारी है।
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लोकायुक्त की संस्तुति क्या कहती है
हरिद्वार। उत्तराखंड के लोकायुक्त न्यायमूर्ति एमएम घिल्डियाल ने इस प्रकरण में 12 जुलाई को प्रमुख सचिव/सचिव, शहरी विकास को शासनादेश में उल्लिखित शर्तों के अनुरूप निस्तारण के लिए मंडलायुक्त को आदेश पारित करने की संस्तुति की थी। लोकायुक्त न्यायालय में मामला ले जाने वाले समाज सेवी रमेशचंद्र शर्मा ने बताया कि आयुक्त को वैध अध्यासियों का चयन कर, वर्तमान सर्किल रेट के आधार पर 30 आवासों का निस्तारण करना है। साथ ही 1958 के शासनादेश के अनुरूप प्राप्त धनराशि को राजकीय कोष में जमा भी कराना है। नगर निगम बोर्ड यदि इसके विपरीत मनमानी कर कोई निर्णय लेता है तो उसका विरोध किया जाएगा।
कोट
नगर निगम कार्यकारिणी की बैठक शुक्रवार को होेगी। जिसमेें विचित्र वाटिका के आवासों को फ्र्री-होल्ड करने सहित सभी मुद्दोें पर विचार विमर्श किया जाएगा। लेकिन अंतिम निर्णय बोर्ड में ही लेगा। दुकानों का किराया प्रकरण, उषा ब्रेको कंपनी के रोपवे का मामला और भगत सिंह चौक से ज्वालापुर की ओर सेक्टर टू बैरियर तक चित्रा टाकीज क्षेत्र के उजड़े दुकानों को विकल्प देने के प्रस्ताव पर विचार होगा। लोक निर्माण विभाग ने इसके लिए एनओसी भी दे दी है।
मनोज गर्ग, नगर प्रमुख।
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80 करोड़ रुपये की भूमि की पैरवी नहीं

हरिद्वार। नगर निगम एक-एक कर करोड़ों की संपत्तियों को गंवाता जा रहा है। निगम की पाश कालोनी न्यू हरिद्वार स्थित स्कूल और क्रीड़ा स्थल (पार्क) की लगभग 80 करोड़ की 10 बीघा भूमि की पैरोकारी ही नहीं कर रहा है। जबकि इस भूमि पर कई लोगों की नजरें हैं।
मध्य हरिद्वार स्थित न्यू हरिद्वार आवासीय कालोनी सबसे पहले विकसित एवं व्यवस्थित कालोनी है। सन 1962 में इस कालोनी को काटा गया था। उत्तर प्रदेश नगर नियोजक विभाग द्वारा स्वीकृत इस कालोनी का नक्शा पालिका के विनियमित प्राधिकारी द्वारा स्वीकृत किया था। बिल्डर द्वारा कालोनी में स्कूल, क्रीड़ा स्थल एवं पार्क के लिए करीब 10 बीघा भूमि सड़क के साथ पालिका परिषद के स्वामित्व में दी थी। लेकिन, नगरपालिका ने स्कूल व क्रीड़ा स्थल नहीं बनाया। भूमि खाली पड़ी रही।
नया हरिद्वार वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष रामबाबू बंसल व महामंत्री श्याम बाबू शर्मा ने बताया कि 17 जुलाई 1995 को कुछ लोगों ने तीन बीघा भूमि की रजिस्ट्री करवा दी। इसके विरुद्ध कालोनी की ओर से सतीश कुमार बडगोती कालोेनी की स्कूल, क्रीड़ा व पार्क की भूमि बेचने के खिलाफ सिविल न्यायालय गए। बाद में नगरपालिका भी इसमें पार्टी बनी। सोसायटी पदाधिकारियों के मुताबिक नगर पालिका यह केस हार गई। बाद में कालोनीवासियों ने संस्था बनाई और 2001 से इस भूमि को बचाने में जुट गए। नया हरिद्वार वेलफेयर सोसाइटी के पदाधिकारियों का कहना है कि भूमि बचाने के लिए अब नैनीताल हाईकोर्ट की शरण ली गई है। लेकिन सोसाइटी के पदाधिकारियों के आग्रह के बाद भी अभी तक नगर निगम हाईकोर्ट में पक्षकार नहीं बना है। जबकि केस की सुनवाई 19 सितंबर को होनी है।
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भाटी ने उठाई थी भूमि बचाने की आवाज
नगरपालिका परिषद के तत्कालीन सभासद दुर्गाशंकर भाटी आवाज नहीं उठाते तो अब तक भूमाफिया ने इस भूमि को ठिकाने लगा दिया होता। भाटी ने 22 फरवरी 2000 को तत्कालीन सहारनपुर मंडल के आयुक्त को इस भूमि को खुर्द-बुर्द होने से बचाने के लिए पत्र लिखा था। डीएम और ईओ नगरपालिका को भी कापी दी गई थी। जिसे ईओ बोर्ड अध्यक्ष को भेजा था। जवाब में ईओ को लिखा गया कि अगर किसी के द्वारा अनाधिकृत कब्जा किया जा रहा है तो तुरंत कब्जा हटाकर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई जाए। अधिकारियों ने रिपोर्ट तो नहीं लिखवाई पर जो बोर्ड लगा था उसको हटा दिया था।
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हाईकोर्ट में पार्टी बनेगा निगम
-नगर प्रमुख मनोज गर्ग ने बताया कि न्यू हरिद्वार की भूमि बचाने के लिए नगर निगम हाईकोर्ट जाएगा। इसके लिए एमएनए को कह दिया है। किसी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उधर, एमएनए जीवन सिंह नागन्याल ने बताया कि भूमि संबंधी फाइल को तलब कर लिया है। निगम जल्द हाईकोर्ट में पार्टी बनने के लिए विधिक कार्रवाई करेगा। किसी के भी भूमि पर कब्जे करने के मंसूबे पूरे नहीं होने दिए जाएंगे।

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