
शिमला। हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) की बसों में किराये में छूट दिलाने वाला ‘यलो कार्ड’ अब दूध बेचने और अखबार बांटने वाले भी बेचेंगे। कारोबारी और कंडक्टरों से भी इन कार्डों को खरीदा जा सकेगा। फिलहाल इस योजना को राजधानी शिमला में शुरू किया गया है। यलो कार्ड बनाने के लिए बस स्टैंड में लगने वाली भीड़ को छांटने और मुसाफिरों को आसानी से कार्ड उपलब्ध कराने के लिए एचआरटीसी ने यह पहल की है।
यलो कार्ड बेचने के इच्छुक लोगों को अपना पंजीकरण बतौर डिस्ट्रिब्यूटर एचआरटीसी कार्यालय में करवाना होगा। 50 रुपये में बनने वाला यलो कार्ड डिस्ट्रिब्यूटर को 45 रुपये में बेचा जाएगा। यलो कार्ड बेचने पर डिस्ट्रिब्यूटर को प्रति कार्ड 5 रुपये कमीशन मिलेगी। वर्तमान में ओल्ड बस स्टैंड और स्कैंडल प्वाइंट स्थित एचआरटीसी के बुकिंग काउंटर पर यलो कार्ड बनाए जा रहे हैं।
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कोई भी ले सकता है यलो कार्ड : बत्ता
एडवांस पेमेंट कर निगम कार्यालयों से यलो कार्ड लिए जा सकते हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए यह व्यवस्था की गई है। यात्रियों के फायदे और निगम की आय बढ़ाने के लिए और योजनाओं पर भी काम चल रहा है।
– आरएन बत्ता
प्रबंध निदेशक, एचआरटीसी
किराये में 20 फीसदी छूट
यलो कार्ड धारक को एचआरटीसी बसों में 40 किलोमीटर के दायरे के अंदर सफर करने पर 20 फीसदी छूट मिलती है। पचास रुपये में बनने वाले यलो कार्ड की वैधता अवधि एक साल है।
हर माह एक लाख की कमाई
एचआरटीसी का लोकल डिपो हर माह करीब एक लाख रुपये की कमाई यलो कार्ड और स्मार्ट कार्ड बेचकर कर रहा है। 2012 में कार्ड बेचकर लोकल डिपो ने करीब ग्यारह लाख साठ हजार रुपये कमाए हैं।
कंडक्टरों के पास भी हैं कार्ड
एचआरटीसी बसों में कंडक्टरों को भी यलो कार्ड उपलब्ध करवाए गए हैं। यात्री सफर के दौरान बसों में कंडक्टर से भी अपना यलो कार्ड बनवा सकते हैं।
