
पांगणा (मंडी)। करसोग वन मंडल में सरकार की ओर से चलाई जा रही वाटरशेड योजना नौ पंचायतों के सैकड़ों ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। कारण, एक साल पहले की गई मजदूरी का पैसा अभी तक ग्रामीणों को नहीं मिल पाया है। योजना के तहत नौ पंचायतों में एक करोड़ 81 लाख 27 हजार 4 सौ का काम तो वन विभाग ने करवा दिया। बजट की पहली किस्त 67 लाख 25 हजार 8 सौ 88 रुपये खर्च करने के बाद अभी तक वन विभाग को नौ पंचायतों के करोड़ लोगों से करवाए काम की करीब एक करोड़ 14 लाख रुपये की देनदारी बाकी है।
वाटरशेड योजना में करसोग वन मंडल की ग्राम पंचायत महोग, कुठेहड़, पोखी, सराहन, गवालपुर, तेबन, ठाकुरठाना, रिछणी और केलोधार आदि पंचायतों में 200 हेक्टेयर भूमि पर पौधरोपण, 6 नर्सरी और 832 चैक डैम, तालाब आदि का निर्माण किया। विभागीय जानकारी के तहत यह काम विभाग ने मार्च 2013 को पूरा कर दिया है। करीब एक साल बीत जाने पर भी मजदूरी का भुगतान न मिलने पर ग्रामीणों में वन विभाग और सरकार के प्रति खासा रोष है।
स्थानीय निवासी विजय कुमार, सुबाराम, भगत राम, सतपाल, ठाकुरदास, डागुराम, चरंजीलाल, ललित कुमार, मान दत्त, प्यारे लाल आदि का कहना है कि वन विभाग करसोग के तहत वन परिक्षेत्र सेरी, मगरू, करसोग में वाटर शैड योजना में विभाग ने करोड़ का काम तो करवा दिया है, लेकिन आज तक सैकड़ों परिवारों को काम के बदले वेतन नहीं मिल पाया है।
इस संदर्भ में करसोग वन मंडलाधिकारी आरके सिंह ने कहा कि ग्रामीणों की एक करोड़ 14 लाख के करीब देनदारी बकाया है। विभाग के उच्च अधिकारियों से बजट की मांग की गई। अभी तक विभाग को इस बारे में कोई सूचना नहीं है कि योजना का पैसा कब तक आएगा।
