उत्तराखंड अलर्ट: बाढ़ में जलमग्न दो गांव, डूब सकते हैं तीन और

हरिद्वार जिले के खादर क्षेत्र के गांवों पर एक बार फिर आफत आ गई है। गंगा का तटबंध टूटने से गंगदासपुर और पंडितपुरी गांव पूरी तरह से बाढ़ के पानी से घिर चुके हैं।

लोग घरों में कैद होने को मजबूर हो गए हैं। कई लोगों ने छतों पर सामान चढ़ा लिया है। देर रात तक तीन और गांवों में बाढ़ का पानी पहुंचने की संभावना है। करीब ढाई माह में इन गांवों में आठवीं बार बाढ़ का पानी घुसा है।

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टूट गया तटबंध
रविवार रात को सोपरी और रणजीतपुर गांव के बीच गंगा का तटबंध कटना शुरू हो गया था। सुबह करीब चार बजे तटबंध पूरी तरह से टूट गया और पानी आबादी की ओर बढ़ने लगा।

सोमवार को बाढ़ का पानी गंगदासपुर और पंडितपुरी के रास्तों और खेतों तक पहुंच गया था। मंगलवार सुबह दोनों गांवों के अंदर पानी घुस गया। जून से लेकर अब तक इन गांवों में आठवीं बार बाढ़ का पानी घुसा है।

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दो महीने तक घुसा रहा पानी
दो महीने तक दो दर्जन गांव बाढ़ के पानी से पूरी तरह से कैद रहे थे। करीब एक पखवाड़े पहले ही बाढ़ का पानी गांवों से उतरा था। अब एक बार फिर बाढ़ आने के बाद ग्रामीणों के सामने पहले की तरह मुश्किलें खड़ी हो गई हैं।

ग्रामीणों को एक बार फिर घरों की छतों पर रहने के मजबूर होना पड़ रहा है। गांवों के रास्तों पर कई फीट तक पानी भर गया है, जिससे आवाजाही प्रभावित हो रही है।

आवाजाही हुई ठप्प
जिस तरह से गंगा का पानी आबादी की तरफ बढ़ रहा है, उससे महाराजपुर खुर्द, नंदपुर और गिद्दावाली गांव के अंदर भी रात तक पानी आने की आशंका है।

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इसके अलावा क्षेत्र के सोपरी, महाराजपुर कला, नंदपुर, भगवानपुर डेरा, कुड़ी हबीबपुर गांवों के रास्तों में पानी भर गया है। रास्तों में पानी भरने से गांवों से आवाजाही एक बार फिर से बंद हो गई है।

जलस्तर और बढ़ा तो तबाही
यदि गंगा का जलस्तर और बढ़ा तो खादर के गांवों में तबाही तय है। पानी कम होने के कारण फिलहाल सोपरी में क्षतिग्रस्त तटबंध से पानी नहीं आ रहा है।

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पहाड़ों में बारिश हुई या फिर टिहरी डैम से पानी छोड़ा गया तो दोनों जगह से अब पानी गांवों की तरफ आएगा। दोनों जगह से पानी आबादी की तरफ बढ़ने के बाद क्षेत्र में ज्यादा नुकसान होगा। ग्रामीण यही दुआ कर रहे हैं कि पहाड़ों में बारिश न हो।

चारे का संकट गहराया
पथरी के जंगल में रहने वाले बाढ़ पीड़ितों के सामने जानवरों के चारे का संकट खड़ा हो गया है। गंगदासपुर और महाराजपुर खुर्द के सैकड़ों परिवार यहां जानवरों के साथ रह रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों और धार्मिक संस्थाओं की तरफ से दिया गया भूसा खत्म हो गया है। ग्रामीण सोमवीर, बिजेंद्र, महावीर आदि का कहना है कि अब जंगल के चारे पर ही जानवर निर्भर है।

इन लोगों का कहना है कि जानवर बीमार भी हो रहे हैं। पशुपालन विभाग की तरफ से पशु चिकित्सकों की टीम जांच के लिए नहीं भेजी जा रही है।

इनकी भी सुनिए
बाढ़ पर प्रशासन की पूरी नजर है। अभी पहले जैसी स्थिति खड़ी नहीं हुई है। यदि ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की नौबत आई तो इसके लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

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