पिता-पुत्र और भतीजे की एकसाथ जली चिताएं

गैरसैंण। सोमवार को गदेरे में बहे पकोल-तिमला गांव के पिता-पुत्र और भतीजे की कुनीगाड़ पैतृक घाट पर अंत्येष्टी की गई। दोनों बच्चे घर के इकलौते चिराग थे।
मंगलवार को लुधियाना से पहुंचे मृतक बलवंत के भाई बचन सिंह ने तीनों चिताओं को मुखाग्नि दी। लोगों को विश्वास नहीं हो रहा था कि कल तक अठखेलियां करने वाले सूरज और करन आज उनके बीच नहीं हैं। बलवंत मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करता था। इकलौते चिराग को अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए रोहिड़ा पब्लिक स्कूल में दाखिला कराया था, जिसे वह स्वयं स्कूल छोड़ने-लेने जाते थे। मृतक के वृद्ध पिता मान सिंह को यकीन ही नहीं हो रहा है कि उनके सामने ही बड़ा बेटा बलवंत और दो पोते सूरज और करन को काल छिन कर ले गया। घर में मातम पसरा है। दर्शनी देवी अपने पति और आठ वर्षीय पुत्र को याद कर रोते-रोते बेहोश हो रही है, जबकि सात वर्षीय करन की मां कला देवी का भी यही हाल है। घर में बेटियां हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं सूझ रहा कि वे इन हालात में क्या करें।

बीस मिनट की बारिश बनी काल
पकोल-तिमला निवासी बलवंत सिंह, उसके पुत्र सूरज और भतीजे करन के लिए सोमवार को बीस मिनट की बरसात काल बनकर बरसी। जीआईसी रोहिड़ा के समीप खड्यूंणी गदेरा बारिश से उफान पर चढ़ गया, जिसे पार करते समय ये तीनों बह गए थे। अवतार सिंह ने बताया कि वे इस घटना के प्रत्यक्षदर्शी हैं। कुछ बच्चों ने पहले ही गदेरा पार कर लिया था, लेकिन उक्त तीनों बह गए।

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