13 प्रभावितों को नहीं मिली मदद

बाढ़ में सीमा देवी की कॉस्मेटिक की दुकान और पीको सेंटर और पुल पार उनके पति की दुकान बह गई है। दो बच्चे स्कूल पढ़ने वाले हैं, जो अब गोपेश्वर रिश्तेदारों के यहां हैं। लेकिन शासन-प्रशासन की ओर से आज तक त्वरित मदद तक नहीं मिल पाई है।
केस दो-
संदीप रावत की भी पुराना बाजार नारायणबगड़ में दुकान थी, जो पिंडर नदी में बह गई। परिवार के भरण-पोषण के लिए इन दिनाें वाहन चला रहे हैं।
केस तीन
धीरु लाल का चिकन सेंटर था, जो आपदा की भेंट चढ़ गया। पहले प्रतिदिन एक हजार से 15 सौ रुपये तक आमदनी होती थी, लेकिन आपदा के तमाचे ने सब छीन लिया। इधर नियमाें के फेर के चलते शासन-प्रशासन से भी त्वरित मदद नहीं मिली है।
केस चार
दलवीर सिंह नेगी ने बैंक से एक लाख रुपये कर्ज लेकर कास्मेटिक की दुकान खोली थी, लेकिन दुकान बहने से अब कर्ज चुकाने का संकट पैदा हो गया है। एक बेटा बीटेक कर रहा है, जबकि दूसरा 11वीं में पढ़ रहा है। ऐसे में परिवार के भरण-पोषण के साथ बच्चों की पढ़ाई का संकट भी पैदा हो गया है।
कर्णप्रयाग। जून की आपदा ने नारायणबगड़ की रौनक के साथ यहां के कई परिवारों की आजीविका भी छीन ली है, जिससे कई परिवारों के सामने परिवार के भरण-पोषण का संकट पैदा हो गया है। स्थिति यह है कि प्रभावित 13 परिवारों को प्रशासन से त्वरित मदद भी नहीं मिल पाई है।
प्रभावित एमएन तिवारी बताते हैं कि आपदा में मेडिकल स्टोर बह गया था। सगे-संबंधियों की मदद से पुन: व्यवस्था तो हो गई। प्रशासन से अभी तक कुछ नहीं मिल पाया है। इसी तरह मनवर सिंह, महावीर सिंह, दिनेश पाल, इंद्र सिंह, त्रिलोक सिंह, राजदर्शन की दुकानें भी बह गई थी। उधर, आपदा नोडल अधिकारी अहमद असलम का कहना है कि नारायणबगड़ में जिन 13 प्रभावितों को अभी तक त्वरित मदद के आठ हजार रुपये नहीं मिले हैं, उनके भवन अनावासीय दिखाए गए हैं। मुआवजे के वितरण में समस्या आ रही है। शासन को अवगत करा दिया है। इस संबंध में जीओ जारी हो चुका है। जल्द उक्त राशि के साथ मुआवजा दिया जाएगा।

Related posts