
गोपेश्वर। बदरीनाथ हाईवे पर मैठाणा में सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के लिए यातायात सुचारु करना किसी चुनौती से कम नहीं है। हाईवे के ठीक ऊपर स्थित पलेठी गांव के नीचे से भू-धंसाव हो रहा है। गांव के दो प्राकृतिक जलस्रोत भूमिगत हो गए हैं, जिनका पानी मैठाणा में मलबे के साथ गिर रहा है। यहां वाहनों की आवाजाही जारी रखने के लिए बीआरओ ने यहां 12 मजदूर और एक पोकलैंड मशीन लगाई है। मैठाणा में अब लोग वाहनों से आवाजाही करने से डर रहे हैं। इधर, गौचर आईटीबीपी कैंपस के समीप कमेड़ा में भी चीड़ के जंगल से भूस्खलन हो रहा है।
मैठाणा में था झिंक्वाणी ताल
मैठाणा में वर्षों पूर्व झिंक्वाणी ताल हुआ करता था। यहां पर रेतीली मिट्टी के ऊपर हाईवे का निर्माण किया गया है। ग्रामीण जगदंबा प्रसाद पुरोहित, दिनेश कोठियाल, सुरेंद्र खंडूड़ी का कहना है कि वर्षों पूर्व मैठाणा में अलकनंदा नदी पर झिंक्वाणी नामक ताल था, जो वर्ष 1971 में बिरही की बाढ़ से टूट गया था। इसके बाद घाटी में रेत के टीले बन गए, जहां से बाद में बदरीनाथ हाईवे का निर्माण किया गया।
मैठाणा में भू-धंसाव रुकने का नाम नहीं ले रहा है। क्षेत्र में बारिश से भी भू-धंसाव बढ़ रहा है। इस पेंच पर हाईवे अवरुद्ध न हो, इसके लिए मौके पर मशीनें लगाई गई हैं। बरसात बंद होने पर ही मैठाणा का स्थायी समाधान किया जाएगा।
-कर्नल निलेश चंदाराना, कमांडर, बीआरओ, जोशीमठ।
