बागवानों ने नकारा सरकार का समर्थन मूल्य

गोहर (मंडी)। एचपीएमसी के खरीद केंद्रों में इस बार सेब न पहुंचने से सन्नाटा पसर गया है। इसका कारण सेब का समर्थन मूल्य बेहद कम होना माना जा रहा है। इससे एचपीएमसी को निरंतर निराशा हाथ लगती नजर आ रही है। इस बार सेब की बंपर पैदावार होने से उपमंडल के बागवान सीधे मंडियों में सेब पहुंचा रहे हैं।
एचपीएमसी के खरीद केंद्रों में सेब बेचने से फिलहाल बागवान गुरेज कर रहे हैं। सरकार ने सेब का समर्थन मूल्य इस साल छह रुपये पचास पैसे घोषित किया है। जिससे अधिक दाम बागवानों को सी ग्रेड माल के लोकल मंडियों में ही मिल रहे हैं। गोहर उपमंडल में एचपीएमसी ने तीन सेब खरीद केंद्र खोले हैं। उपमंडल में चैलचौक, च्यूणी और बगस्याड़ में एचपीएमसी ने सेब एकत्रीकरण केंद्र स्थापित किए हैं। बगस्याड़ केंद्र में बागवानों ने पक्षियों के हमले से खराब हुआ सेब विक्रय किया है। बाकी का सेब बागवान सीधा पंजाब, चंडीगढ़ और दिल्ली की मंडियों में निर्यात कर रहे हैं। चैलचौक और च्यूणी सेब एकत्रीकरण केंद्रों में सन्नाटा पसरा हुआ है। बागवानों का तर्क है कि विभाग उन्हें समय पर पैसों का भुगतान नहीं करता है। दूसरा समर्थन मूल्य कम होने से बागवान अब मंडियों की ओर अधिक जोर दे रहे हैं। जंजैहली घाटी के बागवानों रमेश ठाकुर, भूप सिंह, सुंदर सिंह, गोपाल सिंह, हीरा लाल, ध्यान सिंह, चतर सिंह, योगराज, हरबंस और निहाल सिंह ने बताया कि एचपीएमसी सेब का समर्थन मूल्य बढ़ाती है तो बागवान विभाग को सेब बेचेंगे। बागवानों ने बताया कि सी ग्रेड माल के दस रुपये प्रति किलो दाम उन्हें लोकल मंडियां दे रही हैं तो वे क्यों एचपीएमसी में जाएं। इधर, उद्यान विकास अधिकारी गोहर गोपाल चंद ने बताया कि अब तक करीब पांच सौ से अधिक सेब के ट्रक पंजाब, चंडीगढ़ और दिल्ली के लिए भेजे जा चुके हैं। एचपीएमसी के चैलचौक स्थित इंचार्ज नेक चंद शर्मा ने बताया कि सेब का समर्थन मूल्य सरकार घोषित करती है। अनेक स्थानों पर ओलावृष्टि से सेब की फसल कम है। जिस कारण सेंटरों में सेब नहीं पहुंचा है

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