सुधरेगी संपूर्णानंद शिविर जेल की हालत

सितारगंज। संपूर्णानंद शिविर (खुली जेल) के कायाकल्प को कारागार विभाग की कवायद तेज हो गई है। जेल में अब जल्द ही बंदी रक्षक के रिक्त पदों पर भर्ती होगी और जेल में ही अस्पताल व योगा सेंटर का निर्माण होगा। आईजी कारागार ने सुंदर जेल बनाने की मंशा को जाहिर करते हुए इसे ड्रीम प्रोजेक्ट बताया।
देश की चुनिंदा खुली जेलों में से एक यहां स्थित वर्ष 1960 में बनी संपूर्णानंद शिविर (खुली जेल) की सुरक्षा व्यवस्था मात्र दो डिप्टी जेलरों के कंधों पर है। जबकि यहां जेलर के दो पद व डिप्टी जेलरों के 24 पद स्वीकृत हैं। सिडकुल की स्थापना के बाद सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील इस जेल से कैदियों के फरार होने की संभावना बनी है। जेल 150 बंदियों और 37 खूंखार कैदियों की निगहबानी व सुरक्षा के लिए डिप्टी जेलर के सृजित 24 पदों के सापेक्ष मात्र 2 डिप्टी जेलर, प्रधान बंदी रक्षक के 13 पदों के सापेक्ष मात्र 4, 113 बंदी रक्षक के सापेक्ष 19 बंदी रक्षक ही तैनात हैं। इसके अलावा छह फार्मेसिस्ट के सापेक्ष तीन फार्मेसिस्ट अपनी सेवाएं हरिद्वार व देहरादून की जेलों में दे रहे हैं।
शनिवार को उप महानिरीक्षक कारागार विनोद शर्मा के निरीक्षण के दौरान वरिष्ठ जेल अधीक्षक मनोज कुमार आर्य ने उन्हें जेल की लचर सुरक्षा से अवगत कराया। आईजी शर्मा ने कहा कि विभाग जेल में रिक्त पदों को लेकर गंभीर है। कहा कि नवंबर तक प्रदेश की सभी जेलों के लिए करीब 30 बंदी रक्षक भर्ती किए जाएंगे। इसके लिए उत्तराखंड प्राविधिक शिक्षा बोर्ड द्वारा जल्द ही परीक्षा आयोजित कराई जाएगी। बोर्ड को परीक्षा संपन्न कराने के लिए 3.50 करोड़ में से 1.40 करोड़ रुपये दे दिया गया है। कहा कि कैदियों के लिए अस्पताल और योगा सेंटर भी बनवाया जाएगा।

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