
चंबा। चंबा में एड्स अपने पांव पसारता जा रहा है। जिले में एचआईवी पाजीटिव के आंकड़ों में बढ़ोतरी होती जा रही है। पिछले वर्ष की अपेक्षा एचआईवी पाजीटिव मरीजों का आंकड़ा 138 से बढ़कर 144 पहुंच गया है। इसमें तीन पाजीटिव रोगियों की पहचान बीते तीन माह में हुई है। जिला एड्स नियंत्रण सोसाइटी ने इस वर्ष अप्रैल से अगस्त माह तक 3500 लोगों के ब्लड की जांच की है। इसमें तीन रोगियों में एचआईवी के लक्षण पाए गए हैं। जिला के लिए सबसे अच्छी खबर यह है कि लोग एड्स के प्रति सचेत हुए हैं। एचआईवी फ्री जांच करवाने वालों के आंकड़ों में भी काफी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। लोग बेझिझक होकर एचआईवी की जांच के लिए क्षेत्रीय अस्पताल में पहुंच रहे हैं। चुवाड़ी और भरमौर जांच केंद्रों मेें भी काफी संख्या में लोग जांच करवा रहे हैं। इसमें एड्स नियंत्रण सोसाइटी का भी अहम योगदान है। सोसाइटी समय-समय पर एड्स संबंधी जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन करती रहती है। लोगों को ब्लड की जांच करवाने के बारे में प्रेरित किया जाता है। सिंतबर, 2012 में जिला में एड्स रोगियों की संख्या 138 थी, जो अब बढ़कर 144 हो गई है। जिला एड्स नियंत्रण कार्यक्रम अधिकारी डा. रामकमल ने बताया कि एड्स रोग की रोकथाम के लिए जिला में योजनावद्ध तरीके से कार्य किया जा रहा है। जिला में चंबा, भरमौर, चुवाड़ी में एड्स की फ्री में जांच की जाती है। इसकी जांच रिपोर्ट भी गुप्त रखी जाती है। उन्होंने बताया कि लोगों को बिना संकोच के अपने ब्लड की जांच करवानी चाहिए।
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क्यों जरूरी है एचआईवी की जांच :
एड्स एक ऐसा रोग है, जिसके लक्षण शरीर में छह से आठ वर्षों के बाद देखने को मिलते हैं। बीच के इन वर्षों में मरीज को रोग के होने का आभास तक नहीं होता है। मात्र ब्लड की जांच के बाद भी एचआईवी पाजीटिव की पुष्टि संभव है। इसलिए प्रदेश सरकार ने ब्लड की जांच का निशुल्क प्रावधान कर रखा है। शुरू में अगर एड्स के रोग का पता चल जाए तो इसकी रोकथाम की जा सकती है और अन्य लोगों को इसकी चपेट में आने से बचाया जा सकता है।
