
धर्मशाला। बरसात के मौसम में होने वाला तेज बुखार स्क्रब टायफस हो सकता है। इन दिनों लोग बुखार से ज्यादा ग्रस्त हो रहे हैं। जिला में मरीजों में स्क्रब टायफस बीमारी की पुष्टि नहीं हो पाई है। मगर, अस्पतालों में तेज बुखार होने की स्थिति में स्क्रब टायफस बीमारी को ध्यान में रखकर ही मरीजों का इलाज किया जा रहा है। तेज बुखार वाले मरीजों को टेटरामासिन दवाई दी जा रही है। अगर, इन मरीजों को स्क्रब टायफस है, तो इससे जल्द उपचार होगा।
फिर भी दवाई का असर नहीं होता है तो मरीजों के जरूरी टेस्ट करवाकर इलाज किया जाएगा। हालांकि अलग-अलग अस्पतालों में बुखार से पीड़ित मरीजों के खून के सैंपल भी लिए जा रहे हैं। इन सैंपलों को जांच के लिए लैब में भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही बीमारी का सही पता चल पाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने स्क्रब टायफस बीमारी से निपटने के लिए तमाम जरूरी दवाइयां भेज दीं हैं। इससे मरीजों का स्क्रब टायफस होने की स्थिति में तुरंत इलाज किया जाएगा। उधर, चिकित्सकों की मानें तो दुर्गम और चंगर इलाकों में झाड़ियाे में पनपने वाले पिस्सू के काटने से स्क्रब टायफस होता है। इसके बाद मरीज को तेज बुखार आता है। अगर समय रहते इलाज न हो तो मरीज की जान भी जा सकती है। वहीं, सीएमओ डा. ध्रुव एस. गुरुंग ने बताया कि टेटरामासिन दवाई हर अस्पताल में भेज दी गई है। उन्होंने कहा कि तेज बुखार स्क्रब टायफस हो सकता है। ऐसे में इस दवाई के सेवन से बीमारी से बचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि तेज बुखार होने पर खून के सैंपल भी लिए जा रहे हैं।
