
मंडी। मंडी शहर की गलियों का अंधेरा दूर करने के लिए भले ही प्रदेश सरकार आगे आई है। मगर इससे नगर परिषद की जेब पर ही कैंची चलेगी। नौ करोड़ के करीब स्ट्रीट लाइट्स के बकाया बिल को अदा करने के लिए प्रदेश सरकार ने हामी तो भर ली है, लेकिन यह पैसा नप को राज्य वित्तायोग की ओर से दी जाने वाली सालाना ग्रांट से ही अदा किया जाएगा। इस कारण मंडी नगर परिषद को अपने कर्मचारियों की तनख्वाह देने के भी लाले पड़ जाएंगे। मंडी नप को स्ट्रीट लाइट्स के बिल के रूप में बिजली बोर्ड को 11 करोड़ रुपये की देनदारी थी। इसे लेकर गत वर्ष विद्युत बोर्ड नेे मंडी शहर में करीब बीस दिन तक स्ट्रीट लाइट काट दी थी। इसके बाद हाईकोर्ट के निर्देश पर नगर परिषद को दो करोड़ रुपये अदा करने पड़े थे। मगर अब भी नप को बिजली बिल के नौ करोड़ रुपये की अदायगी करनी है। इसे लेकर प्रधान सचिव शहरी विकास के साथ हुई बैठक में यह तय किया गया है कि राज्य सरकार की ओर से मिलने वाली ग्रांट से बिजली के बिल की अदायगी की जाएगी। मंडी नप को राज्य वित्तायोग से सालाना तीन करोड़ की ग्रांट दी जाती है। इससे नगर परिषद अपने कर्मचारियों का वेतन और पेंशन आदि अदा करती है। इस वर्ष करीब डेढ़ करोड़ की ग्रांट नप को मिल चुकी है। ऐसे में बिजली बिल की तीन करोड़ की राशि अदा करने के लिए राज्य सरकार को अपने खाते से डालने पड़ेंगे, जबकि शेष पांच करोड़ के करीब सरचार्ज को माफ करने की बात की जा रही है। इधर, शहरी निकाय कर्मचारी महासंघ ने ग्रांट के पैसे को काटने का विरोध किया है। संघ के राज्य अध्यक्ष कुलदीप ठाकुर ने कहा कि नगर निकायों के पास कर्मचारियों को वेतन देने के लिए कोई हैड नहीं है। ऐसे में राज्य सरकार से मिलने वाली ग्रांट से ही वेतन और पेंशन की व्यवस्था की जाती है। अगर यह पैसा भी बिजली बिल अदा करने में लगा दिया तो कर्मचारियों को वेतन के लाले पड़ जाएंगे। सरकार बिजली बिल अदा करने की अतिरिक्त व्यवस्था करे। वहीं, नप के कार्यकारी अधिकारी केआर ठाकुर का कहना है कि बिजली बोर्ड को बकाया राशि की अदायगी सालाना ग्रांट से की जाएगी। उन्होंने कहा कि बिजली का बिल करीब तीन करोड़ के लगभग है, जबकि पांच करोड़ के करीब बिजली बोर्ड ने सरचार्ज लगा रखा है। इसे माफ करने को लेकर सरकार से बात करने का प्रयास किया जा रहा है
